आख़िर किसकी नज़र लग गयी हिंदुस्तान को
ऐसे तो नहीं थी अपने मुल्क की आबो हवा .?
झूठी आस्था और खोखले मज़हबी पाखंड के नाम पर जिस तरह नंगा नाच का खेल पुलिस वालों की मौजूदगी में ...पिछले दिनों गुजरात के ऊना ज़िले में गौरक्षा दल ने दलितों के साथ खेला उससे इंसानियत ही नहीं हिंदुस्तान की तहज़ीब भी पूरी दुनियाँ में शर्मसार हुयी है ।
अच्छे दिनों के मसीहा को पूरी दुनियाँ में अपना 56 इंच का सीना चौड़ा कर फ़ख़्र से बताना चाहिए के वो उस देश के प्रधान मंत्री हैं जहाँ झूठी आस्था के नाम पर बीच सड़क पर इंसानों को जानवरों की तरह पुलिस प्रशासन की हाज़री में पीटा जाता है....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ गौ- माँस के नाम पर किसी अख़लाक़ को पीट पीट कर मार दिया जाता है ....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ मुसलमान मुक्त भारत की बात की जाती है, वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ मुहब्बत को भी लव जिहाद का नाम दिया जाता है, वो उस देश के प्रधान मंत्री हैं जहाँ मंदिर मस्जिद और घर वापसी एवं गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों और दलितों को निशाना बनाया जाता है ....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद के नाम पर उनके भक्तों द्वारा देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट दिया जाता है ।
कितना तरक़्क़ी कर गया अपना मुल्क इन ढाई सालों में...
जय हो
आगये हमारे अच्छे दिन ....।
लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय,
आपको एक वाक़या याद दिलाना चाहता हूँ ..
राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जब संसद की सीढ़ियों से उतरते हुए पण्डित जवाहर लाल नेहरु के पैर फिसलने पर गिरने से बचा लिया था और ...मुस्कुराकर नेहरु को आगाह किया था के सियासत के क़दम जब भी लड़खड़ाए हैं अदब और साहित्य ने उसे सहारा दिया है .........आज 60 साल बाद फ़िर से वही अदब और साहित्य सियासत के लड़खड़ाते क़दम को देखकर आपको आगाह कर रहा है .....अगर इसी तरह
सरकार ख़ामोश रही तो वो दिन दूर नहीं जब देश सिविलवार (गृहयुद्ध) के ख़तरे का शिकार होजायेगा....
जागिए नींद से हुज़ूर ....
इससे पहले के देश फ़िर से बँट जाये....।
#ShahzadaKaleem

















