शनिवार, 16 जुलाई 2016

गुजरात मे 4 दलित की पिटाई पर अंतर्राष्ट्रीय शायर शहज़ादा कलीम ने प्रधानमंत्री को किया आगाह

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आख़िर किसकी नज़र लग गयी हिंदुस्तान को
ऐसे तो नहीं थी अपने मुल्क की आबो हवा .?

झूठी आस्था और खोखले मज़हबी पाखंड के नाम पर जिस तरह नंगा नाच का खेल पुलिस वालों की मौजूदगी में ...पिछले दिनों गुजरात के ऊना ज़िले में गौरक्षा दल ने दलितों के साथ खेला उससे इंसानियत ही नहीं हिंदुस्तान की तहज़ीब भी पूरी दुनियाँ में शर्मसार हुयी है ।

अच्छे दिनों के मसीहा को पूरी दुनियाँ में  अपना 56 इंच का सीना चौड़ा कर फ़ख़्र से बताना चाहिए के वो उस देश के प्रधान मंत्री हैं जहाँ झूठी आस्था के नाम पर बीच सड़क पर इंसानों को जानवरों की तरह पुलिस प्रशासन की हाज़री में पीटा जाता है....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ गौ- माँस के नाम पर किसी अख़लाक़ को पीट पीट कर मार दिया जाता है ....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ मुसलमान मुक्त भारत की बात की जाती है,  वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ मुहब्बत को भी लव जिहाद का नाम दिया जाता है,  वो उस देश के प्रधान मंत्री हैं जहाँ मंदिर मस्जिद और घर वापसी एवं गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों और दलितों को निशाना बनाया जाता है ....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद के नाम पर उनके भक्तों द्वारा देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट दिया जाता है  ।

कितना तरक़्क़ी कर गया अपना मुल्क इन ढाई सालों में...
जय हो
आगये हमारे अच्छे दिन ....।

लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय,

आपको एक वाक़या याद दिलाना चाहता हूँ ..
राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जब संसद की सीढ़ियों से उतरते हुए पण्डित जवाहर लाल नेहरु के पैर फिसलने पर गिरने से बचा लिया था और ...मुस्कुराकर नेहरु को आगाह किया था के सियासत के क़दम जब भी लड़खड़ाए हैं अदब और साहित्य ने उसे सहारा दिया है .........आज 60 साल बाद फ़िर से वही अदब और साहित्य सियासत के लड़खड़ाते क़दम को देखकर आपको आगाह कर रहा है .....अगर इसी तरह
सरकार ख़ामोश रही तो वो दिन दूर नहीं जब देश सिविलवार (गृहयुद्ध)  के ख़तरे का शिकार होजायेगा....

जागिए नींद से हुज़ूर ....

इससे पहले के देश फ़िर से बँट जाये....।

#ShahzadaKaleem
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शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

क्या हमे सिर्फ कश्मीर चाहिए कश्मीर के लोग नहीं : वसीम अकरम त्यागी

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कश्मीर में सौ से ज्यादा नौजवानों की आंखें सेना की गोली से फोड़ दी गईं तब जाकर गृहमंत्री की आंखें खुली और उन्होंने ट्वीट करके कश्मीर में शान्ति बनाने की अपील की।

 देश की संपत्ती का नुकसान हरियाणा और गुजरात में भी हुआ था मगर वहां ऐसी बर्बरियत देखने को नहीं मिली थी जैसी कश्मीर में सामने आई है।

आखिर क्या वजह है कि जो सेना हरियाणा और गुजरात में इस कद्र दयालू हो जाती हो कि अपने हथियार तक छिनवा देती हो वही सेना कश्मीर जाकर इतनी बलशाली कैसे हो जाती है ?


 सोशल मीडिया पर एक तबका है जो कश्मीर में गिरने वाली लाशों की गिनती फुटबॉल के गोल या क्रिकेट मैच के विकेट गिरने से कर रहा है।


एक चीज से समझ से बाहर है जब देश के दूसरे राज्यों में विरोध प्रदर्शन होता है सरकारी अथवा निजी संपत्ती को नुकसान पहुंचाया जा रहा होता है तब वैसी कार्रावाई नहीं होती जैसी कश्मीर में होती है। लाशें गिरीं, आंखें फोड़ीं गईं ऐसी बर्बरियत सरकार सेना अपने ही देश के नागरिकों के प्रति दिखा रही है। क्या कश्मीर में मरने वाले प्रदर्शनकारी इस देश के नागरिक नहीं हैं ?

या फिर हमें सिर्फ कश्मीर चाहिये कश्मीरी नहीं ?

✍� Wasim Akram Tyagi
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सोमवार, 11 जुलाई 2016

झूटी खबर फ़ैलाने वाली मिडिया क्या सबके सामने माफ़ी मांगेगी : शायर शहज़ादा कलीम

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"जिस दिन भी हिचकिचायेगी सच से ये शायरी
 काग़ज़ को  फाड़  देंगे क़लम तोड़ देंगे हम..।"

लिखता रहूँगा....आख़री साँस तक.........हक़ और
इंसाफ़ की आवाज़ बनकर.....

वरना अलविदा कह दूँगा इस दोगले चेहरे और भड़ैती के अलंबरदारों से सजे मंचों की दुनियाँ को......मेरा ज़मीर इतना भी नहीं गिर गया के घूमता रहूँ लग्ज़री गाड़ियों में ग्लैमर के नशे में डूबकर और मेरी क़ौम.. समाज, देश नफ़रतों के बारूद के मुहाने पर हो.....।

ज़ाकिर नाइक को बदनाम करने की
 घिनौनी कोशिश..।

एक अपील....ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कर लोगों तक
पहुँचायें..।
.....

डॉ. ज़ाकिर नाइक को बदनाम करने वाली दोगली मीडिया जिसतरह बिना किसी सुबूत के एक ज़िम्मेदार इंसान को बदनाम करने पर तुली है.....ऐसे वक़्त में जब  एक लम्बे
चौड़े मीडिया ट्रायल के बाद आख़िरकार 'दि डेली स्टार'
नामक बंगला देशी अख़बार को कुछ शर्म आई है ....और वो अपने उस न्यूज़ आर्टिकल से पल्लू छुड़ाते हुए जिसमें उसने एक ढाका आतंकी को डॉ ज़ाकिर नाइक से मुतास्सिर बताया था..से पीछे हट गया है ........और भी सुबूत न मिलने पर अपनी इस घिनौनी हरकत के लिए  क्या बिकाऊ मीडिया ....डॉ. ज़ाकिर नाइक से पूरी दुनियाँ के सामने
खुले तौर पर माफ़ी मांगेगी..?
ये सवाल है मशहूर शायर शहज़ादा कलीम का

     रही बात डॉ. ज़ाकिर नाइक की तो डॉ. ज़ाकिर नाइक कोई लापता इंसान नहीं हैं...महाराष्ट्रा में आपकी सरकार.है..केंद्र में आपकी सरकार....अगर वो क़ुसूरवार हैं तो दर्ज कीजिये उनपर मुक़दमा...और अगर ग़ैर ज़मानती धारा लग रही है तो गिरफ़्तार कीजिये उन्हें कौन रोक रहा है आपको..?

जिस तरह का जाल बना गया ज़ाकिर नाइक इस वक़्त जेल में होते ख़ुदा न ख़ास्ता आज अगर उनके बयान आन दी रिकॉर्ड न होते...क़ानून को अपना काम करने दीजिये सबकुछ सच्चाई सामने आएगी बस इंतज़ार
करिये..।

डॉ ज़ाकिर नाइक के ज़रिये जो खेल खेला जारहा है उससे साफ़ महसूस होता है के एक ख़ास तबक़े का चैन सुकून छीनने की कोशिश की जारही है..।    यूपी चुनाव के मद्देनज़र हर बात का राजनीतिक तमाशा मत बनाइये.... कैराना भी खेल लिया,  लव जिहाद भी खेल लिया,  मुस्लिम मुक्त भारत भी खेल लिया, गऊ माता  और घर वापसी भी खेल लिया, अब मुस्लिम धर्म गुरुओं को आतंकवादी बताने का खेल खेला जारहा है..।

चैनलों और मीडिया में डॉ. ज़ाकिर नाइक के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी करने वाले मसलक़ों के ठेकेदार कुछ उलमा
भी इस खेल को नहीं समझ पारहे हैं ..।

कुछ तो शर्म करिये...

रही बात इस्लाम की तो पढ़िये पहले इस्लाम.को .क्योंकि इस्लाम कहता है......

"पयामे अहले आलम का ये ईमाँ हो नहीं सकता
लहू का है जो प्यासा वो निगहबां हो नहीं सकता
जो क़त्ले आम करता है ज़मीं पर बेगुनाहों का
दरिन्दा होगा कोई वो मुसलमाँ हो नहीं सकता ।"

#ShahzadaKaleem
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रविवार, 10 जुलाई 2016

एक सवाल जो ज़ाकिर नाइक के खिलाफ है उम्मीद है वो जवाब जरूर देंगे

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मैं नही जानता की डॉक्टर नायक सही हैं या ग़लत...
पर कुछ उलेमाओं को देख रहा हू जो डॉ ज़ाकिर को गिरफ्तार करने के लिए सड़कों पे उतर आये। उनका विरोध पूरी ताक़त के साथ कर रहे हैं।। अगर डॉ ज़ाकिर नायक ग़लत हैं तो अच्छी बात है विरोध लाज़मी है।
मगर ये उलेमा भारत की जेलों में बंद बेगुनाह मु सलमानो की रिहाई के लिए कभी सड़क पे नहीं उतरे।
गुजरात जला.... मोदी के ख़िलाफ़ नहीं उतरे
मुज़फ्फरनगर जला....अखिलेश के ख़िलाफ़ नहीं उतरे
मुसलमानो के खिलाफ भारत में हुए 26000 दंगों के खिलाफ नहीं उतरे।
सच्चर कमिटी और रंगनाथ मिश्रा कमीशन रिपोर्ट लागू कराने के लिए सड़क पे नहीं उतरे जिस से मुसलमानो को शिक्षा और सरकारी नौकरियां मिलनी हैं।
भारत में नफरत की बीज डाल रहे भगवत, तोगड़िया, योगी, प्राची साध्वी, प्रज्ञा साध्वी , असीमानंद, कर्नल पुरोहित और तमाम संघियों के ख़िलाफ़ सड़क पे नहीं उतरे जिससे मुसलमानो की आने वाली नस्लों को खतरा है।
मगर अपने एक भाई के खिलाफ सीना फुला कर ऐसे सड़क पे उतरे हैं जैसे भारत से अफगानिस्तान तक की हुकूमत इनके बाप की है।।।
शर्म आनी चाहिए।।।
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शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

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देश में हिंदुत्व के अजेंडे वाली सरकार सत्ता में हो और मुसलमानों को निशाना न बनाया जाए ऐसा हो ही नहीं सकता; आज यह लोग ज़ाकिर नाईक साहब पर ऊँगली उठा रहे हैं कल हमारे नमाज़ पढ़ने पर भी इन्हें ऐतराज़ होगा। ऐसे कब तक चुप बैठे रहेंगे हम??“
यह कहना है कश्मीर की सड़कों और सोशल मीडिया पर इस्लामिक प्रचारक डॉ. ज़ाकिर नाईक के समर्थन में उतरे लोगों का। और अगर आप यह सोच रहे हैं कि डॉ. ज़ाकिर के समर्थन में सामने आने वाले लोग मुस्लिम हैं तो आप गलत हैं।

बांग्लादेश में पिछले दिन हुए आतंकी हमले के बाद से उठ रही ख़बरों से जहाँ मीडिया में यह बात फैली कि ढाका के रेस्टोरेंट में हमला करने वाले हमलावर ज़ाकिर नाईक की शिक्षाओं और लेक्चर्स से प्रभावित थे वहीँ देश में हिंदुत्व मोर्चे वाले संगठनों को इस्लामिक प्रचारक डॉ. ज़ाकिर नाईक की तरफ ऊँगली उठाने और इस्लाम को घेरने का एक और मौका मिल गया ऐसे में देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सुरक्षा एजेंसियों को ज़ाकिर नाईक की लेक्चर विडिओज़ की जांच के आदेश के बाद पूरी दुनिया से लोग डॉ. ज़ाकिर के समर्थन में उतर आये हैं।

बात करें भारत की तो ज़ाकिर के समर्थन में सबसे पहले कश्मीर के लोगों ने आवाज़ उठाई है और कश्मीर में इस वक़्त लोग डॉ. ज़ाकिर के समर्थन में लिखे बैनर, पोस्टर लेकर सड़कों पर उतर आये हैं और नारे लगाकर अपना समर्थन और सरकार के प्रति अपना गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं।

इसके इलावा मीडिया भी इस विवाद को लेकर (बिकाऊ मीडिया नहीं) डॉ. ज़ाकिर नाईक की तुलना हिंदूवादी नेताओं जैसे की साध्वी प्राची, मोहन भागवत, कमलेश तिवारी जैसे लोगों से कर यह कहना छह रही है कि कार्यवाई सिर्फ मुस्लिम प्रचारक डॉ. नाईक पर नहीं इन हिंदूवादी नेताओं पर भी होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि ऐसे लोगों को जाती के आधार पर नहीं बल्कि उनके भाषणों के आधार पर कानून से सजा मिलनी चाहिए। अगर ज़ाकिर गलत हैं तो उन्हें भी सज़ा मिले लेकिन पहले इन हिंदूवादी नेताओं को भी सजा दी जाए।

(साभार सियासत हिन्दी से)
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बुधवार, 6 जुलाई 2016

ईद के नमाज़ की नियत करने का तरीका

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🆎ईद की नमाज़ का तरीक़ा :
 -
 🆎पहले नियत  करें

👉नियत की मैने दो  रकात नमाज ईदुलfitreकी मा जाईद छः तकबीरो के मुॅह मेरा काबा शरीफ की तरफ
👉फिर अल्लाह ह अकबर कहैं
इमाम तकबीर कहकर हाथ  बांधकर सना पढ़ेगा । इसके बाद ज़ाईद तकबीरैं होंगी ।

🆎पहली तकबीर केहकर हाथ कानों तक उठाकर छौड़ना हे ।
🆎दुसरी तकबीर केहकर हाथ कानों तक उठा कर छौड़ना हे ।
🆎तीसरी तकबीर कहकर हाथ कानों तक उठाकर बांधना हे

🆎इसके बाद क़िरात होगी और रुकु सजदा करके पहली रकात मुकम्मल करली जाऐगी।

🌹दुसरी रकात के लिऐ उठते ही इमाम क़िरात करेगा यानी सुराऐ फ़ातिहा और सूरत पढ़ेगा इसके बाद ज़ाईद तीनों तकबीरैं होंगी

🆎पहली तकबीर केहकर हाथ कानों तक उठाकर छौड़ना हे
🆎दुसरी तकबीर केहकर हाथ कानों तक उठा कर छौड़ना हे
🆎तीसरी तकबीर केहकर हाथ कानों तक उठा कर छौड़ना हे ।
यहां तक ज़ाईद तकबीरें मुकम्मल होगई ।

👉अब इसके बाद बिना हाथ उठाऐ तकबीर कहकर रुकू में जाऐगें ।
👉और बस आगे की नमाज़ दुसरी नमाज़ौं की तरह हे।
फिर सलाम फेरना  होगी  ।

✈आगे शेयर करे  ताकी  कोई  दुसरा भी समझे   ।
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खराब मौसम की वजह से कुछ जगह पर नहीं दिखा चाँद ओलमा ए हिन्द ने कहा ईद कल ही होगी

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मौसम खराब की वजह से नहीं दिखा कुछ शहरो में चाँद
और कुछ शहरो में दिखा भी इस लिए ईद कल है

आज चाँद दिखा इस लिए गुरुवार को यानि कल ईद मनायी जायेगी. इस बात की तस्दीक पटना की खानकाह मोजीबिया व लखनऊ की चांद कमेटी ने भी की है.

हिलाल कमेटी के कल्ब सादिक ने कहा कि आज चांद  दिखा. इसलिए ईद गुरुवार को मनायी जायेगी.
इधर खानकाह मोजीबिया के मिनहाजुद्दीन के हवाले से जारी बयान में कहा गया है कि ईद की नमाज कल यानि गुरुवार को ही पढ़ी जायेगी.
उधर एदारा शरिया के मुफ्ती व इमारत शरिया के हसन रेजा नूरी ने भी गुरुवार को ईद मनाये जाने की तस्दीक की है.
इस बीच केंद्र सरकार के तमाम दफ्तर ईद के लिए सात जुलाई को बंद रहेंगे.
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सोमवार, 4 जुलाई 2016

सऊदी अरब: मदीना शरीफ में हुआ आत्मघाती ब्लास्ट कई लोग जख्मी

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सऊदी अरब मदीना मुनव्वरा में हुआ बम विस्पोट
सूत्रो से ये पता चला है की
कोई इंसान अपने सरीर में बम लगा कर मस्जिद ए नबवी के अंदर जाना चाहता था पर वहा लगे सिक्योरटी गार्ड ने रोका तो खुद पर ही बम फोड़ लिया
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यू एन ने लगाई भारत को फटकार कहा जातिवाद को लेकर कत्ल कराना बन्द करे मोदी सरकार

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 ब्राह्मणी सरकारें हमेशा ही जाति और जातिवाद के खिलाफ उठती हर आवाज का विरोध करती रही हैं. और यदि यह मुद्दा विश्व के सामने उठे तब तो इनका विरोध देखते ही बनाता है. गोलमेज कान्फरेन्स में पहली बार बाबासाहब ने जाति और जातिवाद के कारण देश की बहुत बड़ी आवादी की नरक बनी जिंदगी से विश्व को रुवरु कराया था. जिसका विरोध गांधी, मालवीय सबने किया था. गांधी ने अपने अखबार 'हरिजन' के माध्यम से भी पुरे विश्व को गुमराह किया. भारत में वर्णव्यवस्था के कारण बहुजन के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार की कभी अपने अखबार में चर्चा नहीं की. ये सिलसला रुका नहीं. अब भी जब जातीय भेदभाव और छुआछूत का मुद्दा संयुंक्त राष्ट्र संघ में उठाया जाता है तो भारत सरकार तुरंत विरोध करती है.

अभी भी यही हुआ है. 28 जनवरी 2016 को एक विस्तृत रिपोर्ट 'अल्पसंख्यक मामलों पर' UN में रखी गई है. इसमें 'जातीय भेदभाव' को 'वैश्विक त्रासदी' बताया है. इसमें कहा गया है कि जाति व्यवस्था (भारत में वर्ण व्यवस्था), मानवीय गरिमा, समानता और बंधुत्व के खिलाफ है. रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि कैसे, क्यों एक जाति में पैदा लोग पूज्यनीय हो सकते हैं जबकि दूसरी जाति में पैदा लोग अस्पृशय.

लेकिन भारत की ब्राह्मणी सरकारें इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है. जबकि देश में हालात ऐसे हैं कि - " बहुजन है तो समझो जान से गया" बहुजन यदि छू ले सवर्ण की बाल्टी, तो बहुजन हाथ-पैर से गया. बहुजन यदि मूत दे किसी ठाकुर के खेत में, तो बहुजन जान से गया. बहुजन प्रतिबन्धित हैं नहीं ले सकते,सर्वनाजिक कुओं, नलों, नदी से पानी,यदि ले लिया तो समझो जान से गया.

यदि कोई बहुजन मुख्यमंत्री,बाबासाहब के नाम से बनाये कोई प्रेरणा स्थल,तो समझो सरकार से गया. नया सवर्ण अफसर जब संभाले आफिस,तो पहले शुद्धिकरण करवाता है,यदि पिछला बहुजन अफसर तबादले पर गया. यदि प्रतिनिधित्व कानून से बहुजन तरक्की करें, तो निजीकरण की आड़ में प्रतिनिधित्व कानून गया. यदि एकलव्य अपनी स्वयं की प्रतिभा से,तीरंदाज बन किसी अर्जुन के लिए चुनौती बन जाये,तो एकलव्य का अंगूठा गया.

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बुधवार, 29 जून 2016

गुजरात के एक मंदिर में लगी आग बुझाई मुस्लिम लड़के ने अपनी जान पर खेल कर

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आरती के समय मन्दिर में लगी आग मुस्लिम
लड़को ने जान पे खेल कर आग बुझाई।
मंदिर मे फंसे हिन्दू भाइयो को बाहर निकाल
बचाई जाने।

बचे लोगो ने उन मुस्लिम नौजवानो का शुक्रिया अदा किया
ये हादसा
गुजरात के भचाउ के पास के गाँव में हुआ
 इस हादसे ने
दिया इंसानियत ओर भाईचारे का पैगाम।।
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मंगलवार, 28 जून 2016

शायर इमरान प्रतापगढ़ी का खुला खत CM अखिलेश यादव के लिए

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प्रिय अखिलेश जी.......।

आ गये ना अपने फ़ासिस्ट सलाहकारों के झॉंसे में...?

डी.पी. यादव, रामपाल यादव, अतीक़ अहमद, मुख़्तार अंसारी

इन तमाम अपराधियों को आप अपने नज़दीक नहीं आने देना चाहते !
चलिये मान लिया साहब....!
अच्छी बात है !

लेकिन भाई साहब
वो जो आपके बेहद क़रीब, पार्टी में, अापकी कैबिनेट में कुछ अपराधी बैठे हैं......उन पर चुप्पी क्यूं !
गिनती दर्जनों में है !

अतीक़, मुख़्तार, डी. पी. से दूरी बनाने वाला ये युवा तेवर
उस वक्त क्यूं मजबूर दिखता है जब उसे सपरिवार विधान परिषद का वोट मॉंगने ग़ुन्डों के पास ही जाना पडता है !

मुख्तार पर आपका ग़ुस्सा देखा हम सबने

लेकिन भाई साहब आपका ये ग़ुस्सा उस वक्त कहॉं ग़ायब हो जाता है

जब एक दो टके का दंगाई विधायक विधिवत आपको चुनौती देकर अपने हज़ारों हरियार बंद ग़ुन्डों के साथ कैराना कूच करके दंगों के लिये ज़मीन तैयार करता है !

आप उस वक्त नाराज़ क्यूं नहीं नज़र आते जब प्राची और योगी आदित्यनाथ अापको ललकार कर कहते हैं कि दम है तो हम पर कार्यवाही करके दिखाओ !

अपनी पूरी ताक़त लगाकर रामपाल यादव को नेस्तनाबूद कर देने वाला ये युवा तेवर

अापके चाचा को चिढाकर भाजपा को वोट देने वाले ग़ुन्डे विधायक गुड्डू पंडित के आगे लाचार क्यूं हो जाता है !
रामपाल को तो आप सडक पर पिटवाते हैं लेकिन गुड्डू पंडित के घर एक सिपाही तक नहीं भेज पाते

इसे क्या समझा जाये भाई साहब

कि आपकी नज़र में सिर्फ यादव और मुस्लिम ग़ुन्डे ही अपराधी हैं...........?
बाकी सब दूध के धुले हैं !

नीतीश कुमार ने भी आप जैसा ही काम किया था, छवि भी सुशासन वाली थी, लेकिन वो जानते थे कि सामाजिक न्याय की इस लडाई में फासिस्ट ताक़तों का मुकाबला सिर्फ विकास के नारों से नहीं किया जा सकता !

लालू से हाथ मिलाने पर बिकाऊ मीडिया ने कहा था कि नीतीश की लुटिया डूब जायेगी...।।।
लेकिन नीतीश मोरल दबाव में नहीं आये
परिणाम आपके सामने है

इस बार लडाई बहोत बडी है....... !
फासिस्ट और दंगाई ताक़तों ने कमर कस ली है

और आप मीडिया के उन मुनाफ़िकों से सलाह मशवरा करके फैसले ले रहे हैं, जो आपसे करोडों का विज्ञापन लेकर
लोहिया के ऑंगन में ग़ुन्डे और कैराना को कश्मीर बताने की साज़िशों में लगे हैं !

जागिये भाई साहब
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शनिवार, 25 जून 2016

लखनऊ: स्वामी प्रसाद मौर्या ने छोड़ा बसपा मायावती ने कहा नहीं छोड़ते तो हम निकाल देते

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बीएसपी का दामन छोड़ने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्या ने अपनी राजनीतिक मोर्चाबंदी शुरू कर दी है।उनका कहना है कि एक जुलाई को वो लखनऊ में अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे वहीं सूत्रों की माने तो बीजेपी पिछले कुछ महीनों से मौर्य के संपर्क में है जिससे उनके भाजपा में जाने की सम्भावना प्रबल हो गयी है और वो बीजेपी नेताओं से मुलाकात कर सकते है।
वही आज़म खान का कहना है की
स्वामी प्रसाद मौर्य एसिड की तरह हैं,जहां भी रहेंगे नुकसान ही करेंगे-

आजम खां ने फतेहपुर में मीडिया से कहा कि मौर्य को बसपा में लौट जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने बहुजन समाज पार्टी छोड़ चुके स्वामी प्रसाद मौर्य पर तीखा बयान दिया है. आजम खान ने मौर्य की तुलना एसिड से कर दी है. उन्होंने कहा कि मौर्य एसिड की तरह हैं, जहां भी रहेंगे नुकसान ही करेंगे.आजम ने कहा, 'स्वामी एसिड की तरह हैं. जिस तरह से एसिड से नुकसान होता है, उसी तरह से मौर्य भी केवल नुकसान पहुंचाते हैं. वह जिस भी पार्टी में रहेंगे एसिड का काम करेंगे.' आजम ने बीएसपी प्रमुख मायावती को नसीहत देते हुए कहा है कि वो स्वामी को मना कर पार्टी में दोबारा ले आएं. बता दें कि बीएसपी के तीसरे सबसे बड़े नेता और यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कुछ दिनों पहले बसपा छोड़ दी है.
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बुधवार, 22 जून 2016

रघूराम राजन (गवर्नर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के मुताबिक़ हमारे देश पर 55 लाख 87 हज़ार 149 करोड़ का कर्ज़ है...।

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रघूराम राजन (गवर्नर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के मुताबिक़ हमारे देश पर 55 लाख 87 हज़ार 149 करोड़ का कर्ज़ है...।

जिसका एक साल का ब्याज भरना पड़ रहा है= 4 लाख 27 हज़ार करोड़...।
यानि एक महीने का= 35 हज़ार 584 करोड़...।
यानि एक दिन का= 1 हज़ार 186 करोड़...।
यानि एक घंटे का= 49 करोड़...।
यानि एक मिनट का 81 लाख...।
यानि एक सेकेंड का 1,35,000

अब ज़रा सोचिए! हमारा देश प्रति एक सेकेंड 1 लाख 35 हज़ार रूपये का तो सिर्फ़ पुराने कर्ज़े का ब्याज भर रहा है...।

किसान आत्महत्या कर रहा है क्योंकि उन्होंने अपना ज़मीर बेच दिया है तभी तो हालात से लड़ने के बजाए मौत को चुन रहे हैं... रहा सवाल नेताओं का तो उनका भला कैसा ज़मीर..? बचा ये मुआशरा जो कोल्ड ड्रिंक जैसे ज़हर को ख़रीदते वक़्त तो कोई भाव ताव नहीं करेगा और सब्ज़ी, फल और जितनी भी स्वदेशी चीज़ें हैं उन्हें एक एक पैसा कम कराने की जुगत में रहता है...।

हमारा आज तो गुज़र रहा है लेकिन हमारी नस्लों का आने वाला कल हमारे चुने हुवे नेताओं और हमारे टूटे हुए ज़मीर की वजह से बेकार, बर्बाद व अंधकार में डूबा हुआ रहेगा और इस सब के ज़िम्मेदार हम खुद होंगे...।

हो सकता है कि कुछ लोगों को मेरा ये फिक़्र महज़ एक वाक्य लगे, दुआ करता हूँ कि मैं ग़लत रहूँ इस मसअले पर लेकिन हूँ नहीं ये मैं भी जानता हूँ और आप भी...।

हमारा मकसद किसी पार्टी को टार्गेट करना बिल्कुल नहीं है, क्योंकि अब तक जितनी भी पार्टियों ने राज किया है सबने देश को लूटने का ही काम किया है... सबने आम जनता का खून ही पिया है, कोई न अच्छे दिन ला सका है न ला सकेगा, वजह अपना पेट बस अपना... मीडिया को कैन्सर की बिमारी है, जो राज करेगा उसके तलवे चाटेगी... आगे देश के हालात क्या होने हैं ये किसी लीडर के लिए मायने नहीं रखता...। उन लीडरों की मानसिकता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सब धर्म की राजनीति करने में लगे हैं, देश का बेहतर कल गया तेल लेने...।

इस हालात पे बाबा (मुनव्वर राना) की एक ग़ज़ल सुनहरे अक्षरों में लिखे जाने योग्य है, जो इस परिस्थिति को साफ़ अल्फ़ाज़ों में आईना बनाकर दिखाती है...

हर एक आवाज़ ऊर्दू को फरियादी बताती है
ये पगली फिर भी ख़ुद को शहज़ादी बताती है

यहाँ पिछले कई सालों से काले नाग रहते हैं
वहाँ एक घोसला चिड़ियों का था दादी बताती है

यहाँ विरानियों की एक मुद्दत से हुक़ूमत है
यहाँ से नफ़रतें गुज़री हैं, बर्बादी बताती है

लहू कैसे बहाया जाए ये लीडर समझते हैं
लहू का ज़ाएका क्या है, ये ख़ादी बताती है

गुलामी ने अभी तक मुल्क़ का पीछा नहीं छोड़ा
हमें फिर क़ैद होना है, ये आज़ादी बताती है...।

Tanveer Tyagi
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सोमवार, 20 जून 2016

कौशाम्बी देवीगंज: जकात गरीबो का हक़ है ये तुमपर अल्लाह ने फ़र्ज़ किया है कारी गुलाम गौस

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कौशंबी:कडा के देवीगंज गंज जुमा मस्जिद में रमजान के पाक अवसर पर  रोज़ा अफ्तार का आयोजन किया जिसमे इलाकाई लोंगो के अलावा रास्ता चलते मुसाफिरों ने भी शिरकत की अफ्तार से पहले कारी गुलाम गौस ने मौजूद लोंगो को रोजे के फरायेज़ और फायदे की बात बताई कारी साहब ने बताया की रमजान के इस पाक महीने में अल्लाह ताला रहमत के दरवाजे खोल देता है इस माह में हमें गरीबो की मदद करनी चाहिये अगर आप ने किसी एक गरीब को खाना खिलाया या उसकी मदद की तो आप को सत्तर गरीबो के खाने या मदद के बराबर सवाब मिलेगा
यदि आप के पास साढे सात तोले सोना औए 52तोले चांदी या उसके दाम के बराबर रकम जमा हो या बैंक में हो  तो आप पर गरीबो का हक (ज़कात) फ़र्ज़ है जो की सिर्फ ढाई परसेंट पर सैकड़ा है जो की बहुत ही मामूली बात है यानी एक सौ रूपये में ढाई रुपया हमें गरीबो को देना फ़र्ज़ है यही अल्लाह का फ़रमान है जो हम सब को मानना फ़र्ज़ है रोज़ा अफ्तार का आयोजन नौशाद अहमद मोहम्मद यासीन  सल्लू नजमी जावेद आदि लोंगो ने किया
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शनिवार, 18 जून 2016

लखनऊ ब्राह्मणों के खिलाफ बोलने पर मायावती ने दलित को किया पार्टी से बाहर

Posted by Unknown


लखनऊ. विधानसभा चुनाव के दौरान वोटगणित का रिस्क नहीं उठाने के लिए बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने ब्राह्मणों के खिलाफ बोलने की वजह से पार्टी के सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष संजय भारती को पार्टी से निकाल दिया है. बीएसपी में विधानसभा सीट के पार्टी अध्यक्ष का रुतबा वहीं के पार्टी एमएलए से बड़ा होता है.ये सबको पता है कि मायावती ने आखिरी बार जब सरकार बनाई थी तब उन्होंने दलित और ब्राह्मणों का ऐसा सामाजिक वोटगणित तैयार किया था कि सारी पार्टियां देखती रह गईं. इस बार भी मायावती उस समीकरण में अपनी वापसी की संभावना देख रही हैं. यूपी में करीब 10 फीसदी वोटर ब्राह्मण हैं.पार्टी से निकाले गए संजय भारती पार्टी के दलित नेता हैं और बीएसपी की स्थापना के समय से ही पार्टी से जुड़े हैं. भारती ने कहा है कि उनके फेसबुक को किसी ने हैक करके ब्राह्मण विरोधी बातें लिखीं. भारती ने पार्टी के ही पूर्व मंत्री एमए लारी और प्रमोद गौतम पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है
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