शुक्रवार, 8 जुलाई 2016
देश में हिंदुत्व के अजेंडे वाली सरकार सत्ता में हो और मुसलमानों को निशाना न बनाया जाए ऐसा हो ही नहीं सकता; आज यह लोग ज़ाकिर नाईक साहब पर ऊँगली उठा रहे हैं कल हमारे नमाज़ पढ़ने पर भी इन्हें ऐतराज़ होगा। ऐसे कब तक चुप बैठे रहेंगे हम??“
यह कहना है कश्मीर की सड़कों और सोशल मीडिया पर इस्लामिक प्रचारक डॉ. ज़ाकिर नाईक के समर्थन में उतरे लोगों का। और अगर आप यह सोच रहे हैं कि डॉ. ज़ाकिर के समर्थन में सामने आने वाले लोग मुस्लिम हैं तो आप गलत हैं।
बांग्लादेश में पिछले दिन हुए आतंकी हमले के बाद से उठ रही ख़बरों से जहाँ मीडिया में यह बात फैली कि ढाका के रेस्टोरेंट में हमला करने वाले हमलावर ज़ाकिर नाईक की शिक्षाओं और लेक्चर्स से प्रभावित थे वहीँ देश में हिंदुत्व मोर्चे वाले संगठनों को इस्लामिक प्रचारक डॉ. ज़ाकिर नाईक की तरफ ऊँगली उठाने और इस्लाम को घेरने का एक और मौका मिल गया ऐसे में देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सुरक्षा एजेंसियों को ज़ाकिर नाईक की लेक्चर विडिओज़ की जांच के आदेश के बाद पूरी दुनिया से लोग डॉ. ज़ाकिर के समर्थन में उतर आये हैं।
बात करें भारत की तो ज़ाकिर के समर्थन में सबसे पहले कश्मीर के लोगों ने आवाज़ उठाई है और कश्मीर में इस वक़्त लोग डॉ. ज़ाकिर के समर्थन में लिखे बैनर, पोस्टर लेकर सड़कों पर उतर आये हैं और नारे लगाकर अपना समर्थन और सरकार के प्रति अपना गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं।
इसके इलावा मीडिया भी इस विवाद को लेकर (बिकाऊ मीडिया नहीं) डॉ. ज़ाकिर नाईक की तुलना हिंदूवादी नेताओं जैसे की साध्वी प्राची, मोहन भागवत, कमलेश तिवारी जैसे लोगों से कर यह कहना छह रही है कि कार्यवाई सिर्फ मुस्लिम प्रचारक डॉ. नाईक पर नहीं इन हिंदूवादी नेताओं पर भी होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि ऐसे लोगों को जाती के आधार पर नहीं बल्कि उनके भाषणों के आधार पर कानून से सजा मिलनी चाहिए। अगर ज़ाकिर गलत हैं तो उन्हें भी सज़ा मिले लेकिन पहले इन हिंदूवादी नेताओं को भी सजा दी जाए।
(साभार सियासत हिन्दी से)
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