गुरुवार, 25 मई 2017

रमज़ान में जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते है-मुफ़्ती साजिद हसनी साहब

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रमजान में जन्नत के दरवाजें खोल दिये जातें है- मुफ्ती साजिद हसनी


पूरनपुर पीलीभीत- जामिया खदीजा लिलवनात में आल इण्डिया उलेमा मशाइख वोर्ड की ओर से एक प्रेस काॅन्फै्रन्स का आयोजन किया गया कुरान की तिलाबत के साथ शुभआरम्भ किया गया अध्यक्षता करतें हुए प्रेसवार्ता के दौरान मुस्लिम धर्म गुरू मुफ्ती साजिद हसनी ने कहाकि रमजान माह में जन्नत के दरवजे खोल दियें जातें है। इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने प्रेसवार्ता के दौरान रमजान शरीफ की फजीलत के वारेे में विस्तार से जानकारियां दी। उन्होनें कहा कि 1979 के बाद इस बार लगभग 16 घण्टें का 37 साल के बाद सबसें लम्बा रोजा मुस्लमानों को रखना पड़ेगा चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी में रोजादारों को प्यास की सिद्दत महसूस होगी पर इसके बाद भी मजहब-ए-इस्लाम के माननें वालें इन चीजों से दूर रहकर भी अपनें रोजे पूरें करेगें उन्होने बताया कि यदि रोजदार पांचो वक्त की नमाजें फजर जोहर, असर, मगरिब, इशा और कुरान की तिलाबत करें और अपनें रोजे का पूरा दिन अल्लाह और उसके रसूल अलैहिससलाम के जिक्र (याद) में गुजारेगें तो उन्हें भूख व प्यास का अहसास भी नहीं होगा। रमजान के महीनें में एक नेकी करनें के बदलें सत्तर नेकियों का सबाब मिलता है। उन्होने कहाकि रोजा रखना फर्ज है अगर कोई रोजा न रख सकें तो एक रोजे के बदलें लगातार 60 रोजे रखना होगे, यदि उस व्यक्ति मे 60 रोजे रखनें की ताकत नहीं तो वह 60 दिन गरीब फकीर को भर पेट दोनों समय खाना खिलायें। जो लोग जान-बूझकर रोजा नहीं रखतें है। तो वह लोग सख्त गुनहागार होगें और उनका मुस्लिम समाज से बायकाट किया जायेगा । यह विचार रखतें हुए मुफ्ती साजिद हसनी भावुक हो गयें, उन्होने बताया कि रमजान में जन्नत के दरवाजें खोल दियें जातें है और नर्ख (जहान्नम) के दरवाजें बन्द कर दियें जातें है और शैतानों की भी पूरें माह कैद कर दिया जाता है।
 आल इण्डिया बोर्ड के जिलाध्यक्ष मुफ्ती नूर मो0 हसनी ने बताया कि कलमा, नमाज रोजा, हज, जकात पर मुस्लमानों को अमल करना चाहिए। रमजान माह में खुल्लम-खुल्ला खानें वालों को परहेज करना चाहिए।
 मुफ्ती साजिद हसनी ने बताया कि रोजे की हालत में इंजेक्शन लगवाना सुर्मा लगाना, सर में तेल डालनें से रोजा नहीं टूटता बल्की टयूथपेस्ट और मंजन के बारीक हिस्सें हलक से उतर गयें तो रोजा टूट जायेंगा इसलिए यह चीजे रोजे की हालत में मना है। उन्होनें आला हजरत की तहरीरकर्दा किताब फताब-ए-रजवियां के हिवाले से बताया कि खैनी, तम्बाकू, गुल करने से भी रोजा टूट जाता है। उन्होेने बताया कि जो मुसलमान साहिवे निसाब है। यानी जिनकें पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी या उसके बराबर रकम हो तो उसकी उसकी ढ़ाई प्रतिशत जकात निकालना फर्ज है।  इस वक्त साढ़ें वावन तोला चांदी का मूल्य लगभग 22 हजार है और अगर नही निकाली तो गुनाहगार होगा। उन्होनें मुस्लमानों से रमजान माह में अपील की है कि यतीमों गरीबों फकीरों की मदद करना चाहिए।  क्यों इस माह में एक नेकी के बदलें 70 नेकियों का सबाब मिलता है। आखीर में मुफ्ती साजिद हसनी ने मुल्क में अमनों-अमान की दुआ मांगी। मुहम्मद फरियाद रजा, मुहम्मद सहादत हुसैन, शाहिद रज़ा, जाने आलाम अशरफी, कमरूल हसन, मुफ्ती नूर मो0 हसनी रकीब असंारी आदि लोग मौजूद रहें।
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रविवार, 23 अप्रैल 2017

फ़िज़ूल और मनघड़न्त बाते जिसका इस्लाम से कोई वास्ता नही है

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उम्मीद है आप लोग इसपर अमल करेंगे और अपने दोस्तों को भी बताएंगे

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1) आज क़ुरान शरीफ को 1441 साल पुरे हो गए।

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2)आज सूरज या चाँद ठीक खाने काबा के ऊपर है जो मांगोगो मिलेगा।

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3)बीबी जैनब का ख़्वाब,

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4)बीबी फातिमा की पैदाइश है जो मांगोगो वह मिलेगा।

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5)रमज़ान की मुबारकबाद पहले देने वाले पे जन्नत फर्ज।

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6)जिसने हदीस सुनकर आगे नहीं बढ़ाया उसको जहन्नम।

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7) 786 आगे फॉरवर्ड करो। 2 घंटे में अच्छी ख़बर मिलेगी।
ना किया तो १ साल तक बदनसीब रहोगे।

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8)तुमको अल्लाह की/माँ की क़सम/ नबी सल्ल का वास्ता...
ये sms 9लोग को भेजो, 12 लोग को भेजो।

भाइयो sms सेंड कर देने और न करने से कुछ नहीं होता, ये सिर्फ इंसानी सोच है और शैतानी वसवसा है इस्के अलावा कुछ नहीं। जिसका शरियत से कोई वास्ता नहीं..

क्या ये sms तय करेंगे की जन्नत किसको मिलेगी और जहन्नम किसको??

अगर ऐसा ही होता तो....?
मस्जिद के मौलवी रात की नींद ख़राब कर के फजर के लिए नहीं उठते।
अपनी ज़िन्दगी को इल्मे दीन सीखने में खर्च न कर के दिन भर WhatsApp में सबको sms करते,

अगर मैसेज भेजने से जन्नत जहन्नम का फैसला होता या अच्छि बुरी क़िस्मत का फ़ैसला होता तो नमाज़, रोज़ा, ह़ज, ज़कात, सदक़ा, क़ुरआन करीम की तिलावत और अल्लाह से दुआ़ मांगना वग़ैरह किस काम का?

जन्नत, लंगर का हलवा नहीं जो हाथ बढ़ाया और मिल गई
अजीब जाहिल है वो लोग जो ऐसे sms इजाद करते है। और तो और कुछ लोग डर के मारे आगे फॉरवर्ड कर देते है ताकि हमको कुछ न हो।

कब तक इस तरह की जाहिलाना हरकते चलती रहेगी।
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अल्लाह के वास्ते अब यह सब बंद करिये....
इस मैसेज को खूब शेयर कीजिए ताकि मुसलमान इन बेकार के मनघड़त और वाहियात बातो पे अमल न करे

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रविवार, 9 अप्रैल 2017

बीजेपी विधायक राजा सिंह ने फिर दिया विवादित बयान कहा हम इम्तेज़ार कर रहे है उनके सर कलम करने के लिए

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हैदरबाद: अयोध्या विवाद पर अभी कुछ ही दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से मसले का हल निकाले की सलाह दी थी. इसी बीच अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बीजेपी विधायक ने विवादित बयान दे दिया.

हैदराबाद के गोशामल से बीजेपी के विधायक राजा सिंह ने सभी हदें पार करते हुए कहा, “जो लोग यह कहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. हम उनके इस बात के कहने का इंतजार कर रहे हैं ताकि हम उनका सिर काट सकें.”

आपको बता दें कि बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि का विवाद बीते 65 साल से अदालत में है. 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस विवाद का निपटारा किया था और विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था. अब ये केस सुप्रीम कोर्ट के पास है. बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद पर रोज सुनवाई से इनकार कर दिया था. हालांकि, उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से आपसी बातचीत से इस मुद्दे का हल निकालने का सुझाव दिया था.
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मंगलवार, 27 सितंबर 2016

पूरे जिन्दगी के मसाइल का हल सिर्फ एक हदीस में जरूर पढ़े

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एक अरबी हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दरबार में हाज़िर हुआ और अ़र्ज किया या रसूलल्लाह! मैं कुछ पूछना चहता हूँ... सरकार ने फरमाया कहो...। अर्ज़ किया: मैं अमीर बनना चाहता हूँ...। फ़रमाया: क़नाअत इखि्तयार करो अमीर हो जाओगे...। अर्ज़ किया: मैं सबसे बडा आलिम बनना चाहता हूँ...। फ़रमाया: त़कवा इख्तियार करो आलिम बन जाओगे...। अर्ज़ किया: इज्ज़त वाला बनना चाहता हूँ...। फ़रमाया: मख़लू़क के सामने हाथ फैलाना बन्द कर दो...। अर्ज़ किया: अच्छा आदमी बनना चाहता हूँ...। फ़रमाया: लोगों को फायदा पहुंचाओ...। अर्ज़ किया: आदिल बनना चाहता हूँ...। फ़रमाया: जिसे अपने लिये अच्छा समझते हो वही दूसरों के लिये पसंद करो...। अर्ज़ किया: ताक़तवर बनना चाहता हूँ...। फ़रमाया: अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करो...। अर्ज़ किया: अल्लाह के दरबार में खास दर्जा चाहता हूँ...। फ़रमाया: कसरत से जिक्र ए इलाही करो...। अर्ज़ किया: रिज्क़ में कुशादगी चाहता हूँ...। फ़रमाया: हमेशा बावजू रहो...। अर्ज़ किया: दुआओं की क़बुलियत चाहता हूँ...। फ़रमाया: हराम न खाओ...। अर्ज़ किया: ईमान की तकमील चाहता हूँ...। फ़रमाया: अख्लाक़ अच्छे कर लो...। अर्ज़ किया: क़यामत के दिन अल्लाह से गुनाहों से पाक होकर मिलना चाहता हूँ...। फ़रमाया: ज़नाबत के फौरन बाद गुस्ल किया करो...। अर्ज़ किया: गुनाहों में कमी चाहता हूँ...। फ़रमाया: कसरत से तौबा करो...। अर्ज़ किया: क़यामत के रोज़ नूर में उठना चाहता हूँ...। फ़रमाया: जु़ल्म करना छोड़ दो...। अर्ज़ किया: मैं चाहता हूँ कि अल्लाह मेरी पर्दापोशी करे...। फ़रमाया: लोगों की पर्दापोशी करो...। अर्ज़ किया: रुस्वाई से बचना चाहता हूँ...। फ़रमाया: जिना से बचो...। अर्ज़ किया: चाहता हूँ अल्लाह और उसके रसूल का महबूब बन जाऊँ...। फ़रमाया: जो अल्लाह और उसके रसूल का महबूब हो, उसे अपना महबूब बना लो...। अर्ज़ किया: अल्लाह का फ़रमाबरदार बनना चाहता हूँ...। फ़रमाया: फ़राइज़ का एहतिमाम करो...। अर्ज़ किया: एहसान करने वाला बनना चाहता हूँ...। फ़रमाया: अल्लाह की यूँ बन्दगी करो जैसे तुम उसे या वह तुम्हें देख रहा हो...। अर्ज़ किया: या रसूलल्लाह! क्या चीज़ गुनाहों से माफी दिलाएगी..? फ़रमाया: अाँसू, आजिजी़ और बीमारी...। अर्ज़ किया: क्या चीज़ दोज़ख़ की अाग को ठन्डा करेगी..? फ़रमाया: दुनिया की मुसीबतों पर सब्र...। अर्ज़ किया: अल्लाह के गुस्से को क्या चीज़ ठन्डा करेगी..? फ़रमाया: चुपके-चुपके सदक़ा और सिला रहमी...। अर्ज़ किया: सबसे बडी बुराई क्या है..? फ़रमाया: बुरे अख्लाक़ और बुख्ल (कंजुसी!)...। अर्ज़ किया: सबसे बड़ी अच्छाई क्या है..? फ़रमाया: अच्छे अख्लाक़, तवज्जोह अौर सब्र...। अर्ज़ किया: अल्लाह के गज़ब से बचना चाहता हूँ...। फ़रमाया: लोगों पर गुस्सा करना छोड दो...। Tanveer Tyagi #BBM
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शनिवार, 10 सितंबर 2016

वाज़िब है उसपर क़ुर्बानी जिसके पास 52तोला चाँदी हो या उसके बराबर यानि 23000 रुपया हो पूरा पढ़े

Posted by Unknown 8 Comments

***** मसाइले क़ुरबानी *****

1. जिन लोगों पर क़ुरबानी वाजिब नहीं वो अगर ज़िल्हज्ज के 10 दिनों तक बाल नाख़ून न काटें,तो क़ुरबानी का सवाब पाएंगे
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 131

2. साहिबे निसाब यानि जिसके पास 7.5 तोला सोना या 52.5 तोला चांदी या इसके बराबर की रक़म जो कि तक़रीबन 23000 बन रही है अगर क़ुर्बानी के दिनों में मौजूद है तो उसपर क़ुर्बानी वाजिब है,क़ुर्बानी वाजिब होने के लिये माल पर साल गुज़रना ज़रूरी नहीं
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 132

3. साहिबे निसाब औरत पर खुद उसके नाम से क़ुरबानी वाजिब है,मुसाफिर और नाबालिग पर क़ुर्बानी वाजिब नहीं
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 132

4. रहने का घर,पहनने के कपड़े,किताबें,सफर के लिए सवारियां,घरेलु सामान हाजते असलिया में दाखिल हैं

📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 133
📕 फ़तावा आलमगीरी,जिल्द 1,सफह 160

5. हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि जो इसतेताअत रखने के बावजूद क़ुरबानी न करे तो वो हमारी ईदगाह के क़रीब न आये
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 129

6. 10,11,12 ज़िल्हज्ज को अल्लाह को क़ुरबानी से ज़्यादा कोई अमल प्यारा नहीं,जानवर का खून ज़मीन पर गिरने से पहले क़ुबुल हो जाता है,और क़ुरबानी करने वाले को जानवर के हर बाल के बदले 1 नेकी मिलती है
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 129

7. जिसपर हर साल क़ुरबानी वाजिब है उसे हर साल अपने नाम से क़ुरबानी करनी होगी,कुछ लोग 1 साल अपने नाम से क़ुरबानी करते हैं दूसरे साल अपने बीवी बच्चों के नाम से क़ुरबानी करते हैं,ये नाजायज़ है
📕 अनवारुल हदीस,सफ़ह 363

8. क़ुरबानी का वक़्त 10 ज़िल्हज्ज के सुबह सादिक़ से लेकर 12 के ग़ुरुबे आफताब तक है,मगर जानवर रात में ज़बह करना मकरूह है
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 136

9. जानवरों की उम्र ये होनी चाहिए ऊँट 5 साल,-भैंस 2 साल,बकरा-बकरी 1 साल,भेड़ का 6 महीने का बच्चा अगर साल भर के बराबर दिखता है तो क़ुरबानी हो जाएगी
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 139

10. काना,लंगड़ा,लागर,बीमार,जिसकी नाक या थन कटा हो,जिसका कान या दुम तिहाई से ज्यादा कटा हो,बकरी का 1 या भैंस का 2 थन खुश्क हो,इन जानवरों की क़ुरबानी नहीं हो सकती
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 139

11. मय्यत की तरफ से क़ुरबानी की तो गोश्त का जो चाहे करे,लेकिन किसी ने अपनी तरफ से क़ुरबानी करने को कहा और मर गया तो उसकी तरफ से की गयी क़ुरबानी का पूरा गोश्त सदक़ा करें
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 144

12. क़ुरबानी अगर मन्नत की है तो उसका गोश्त न खुद खा सकता है न ग़नी को दे सकता है,बल्कि पूरा गोश्त सदक़ा करे
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 144

13. नबी करीम सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने 2 मेढ़ों की क़ुरबानी की,जो कि खस्सी थे
📕 मुसनद अहमद,अबू दाऊद,इब्ने माजा,दारमी बहवाला बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 130

14. क़ुरबानी का गोश्त काफिर को हरगिज़ न दे और बदमज़हब मुनाफ़िक़ तो काफ़िर से बदतर है लिहाज़ा उसको भी हरगिज़ न दें
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 144

15. जो जानवर को ज़बह करे बिस्मिल्लाह शरीफ वोह पढ़े किसी दुसरे के पढ़ने से जानवर हलाल न होगा
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 121

16. ज़बह के वक़्त जानबूझकर बिस्मिल्लाह शरीफ न पढ़ी तो जानवर हराम है,और अगर पढ़ना भूल गया तो हलाल है
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफ़ह 119
📕 ज़बीहे इसालो सवाब,सफ़ह 15

17. ज़बह करते वक़्त जानवर की गर्दन अलग हो गई या जानबूझकर भी अलग कर दी,ऐसा करना मकरूह है मगर जानवर हलाल है
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15, सफ़ह 118

18. अरफा यानि 9 ज़िल्हज्ज का रोज़ा अगले व पिछले 1 साल के गुनाहों का कफ्फारा है
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफ़ह 137

19. बेहतर है कि गोश्त के 3 हिस्से किये जायें,1 अपने लिये 1 रिश्तेदारों के लिये और 1 अपने पड़ोसियों के लिये,लेकिन अगर परिवार बड़ा है तो पूरा का पूरा भी रख सकते हैं,मगर जितना भी हो अपने गरीब पड़ोसियों का ख्याल ज़रूर रखें
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफ़ह 144

20. गांव मे चुंकि ईद की नमाज़ नहीं है लिहाज़ा वहां सूरज निकलने के साथ ही क़ुर्बानी हो सकती है मगर शहर मे नमाज़े ईद से पहले हर्गिज़ नहीं हो सकती
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफ़ह 137

#Mufti Sajid Jawani Qadri

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शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

एक ऐसी कहानी जिससे पूरा परिवार इस्लामिक तरीके से ज़िन्दगी बशर करने लगा

Posted by Unknown

बहुत ही प्यारी कहानी ज़रूर पढ़ें
वह गर्मियों की एक तपती दोपहर थी। ऑफिस से मैं छुट्टी ली हुई थी क्योंकि घर के कुछ जरूरी काम निपटाने थे। बच्चों को कंप्यूटर पर गेम खेलना सिखा रहा था कि बाहर बेल बजी। काफी देर के बाद दूसरा बैल हुई तो मैं जाकर दोराज़ह खोला। सामने मेरी ही उम्र के एक साहब खड़े थे।
"... अ अलैकुम ....!" उन्होंने बेहद अच्छे तरीके से हाल चाल पुछा। पहले तो मेरे मन में ख्यालआया यह कोई चंदा आदि लेने वाले हैं। उनके चेहरे पर दाढ़ी खूब सज रही थी, और कपड़े से वह चंदा मांगने वाले हरगिज़ नहीं लग रहे थे।
"जी फरमाये, मैंने पूछा। "आप ताहिर साहब हैं?"
'' जी '' मैं मुख़्तसर जवाब दिया। "वे मुझे रफीक साहब ने भेजा है। शायद आपको किराएदार की जरूरत है।" हाँ हाँ ...!
"मुझे अचानक याद आया कि मैं ऑफिस के एक साथी को बताया था कि मैं अपने घर का ऊपर वाला हिस्सा किराए पर देना है अगर कोई नेक और छोटे परिवार उसकी नज़र में हो तो बताए। क्योंकि कार्यालय वेतन खर्च पूरे नहीं होते। मुझे दुख हुआ कि मैं इतनी धूप में काफी देर इसे बाहर खड़ा रखा। "
इसे छह महीने के लिए मकान किराए पर चाहिए था। क्योंकि अपना मकान गिराकर दुबारा तामीर करवा रहे थे। मैं तीन हजार किराया बताया। लेकिन बात दो हजार से पक्की हो गई। वह चला गया तो मुझे अफसोस होने लगा कि किराया कुछ कम है। जबकि ऊपर केवल एक छोटा सा कमरा, रसोई और बाथरूम था।
मुझे अपनी पत्नी की तरफ से डर लगा था कि उसे पता होगा तो कितना झगड़ा होगा। और वही हुआ। बकौल उसके दो हजार तो केवल बच्चों की फीस है। मुझे उसने काफी बुरा भला कहा और चुपचाप सुनता रहा, और अपनी किस्मत को कोसते रहा  मैं एमएससी में बहुत ज़्यादा नंबर से किया था। इसलिए तुरंत नौकरी मिल गई, नौकरी मिली तो शादी भी तुरंत हो गई। मेरी पत्नी भी बहुत पढ़ी लिखी थी। वह भी एक अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाती थी, हमारे तीन बच्चे थे। मगर खर्चा बहुत मुश्किल से चलता था।
अगले ही दिन वह साहब और उनकी पत्नी बच्चे हमारे घर पे आ गए। उनकी पत्नी ने पूरी शरई पर्दा क्या हुआ था। दोनों बड़े बच्चे बहुत ही सभ्य और सुंदर थे। छोटा गोद में था। कुछ दिनों बाद एक दिन में ऑफिस से आया तो मेरी पत्नी ने बताया कि मैं बच्चों को किराएदार महिला से कुरान पढ़ने के लिए भेज दिया है। अच्छा पढ़ाती हैं, अपने बच्चे इतनी सुंदर किरात करते हैं।
कुछ दिन बाद जब मैं उनके एक बेटे से केरात सुनी तो पहली बार मेरे मन में इच्छा उभरी कि काश हमारे बच्चे भी इतना अच्छा कुरान पढ़ें। एक दिन में बाहर जाने लगा तो अपनी पत्नी से पूछ ही लिया कि वह पार्लर जाएगी तो लेता चलूं। क्योंकि पहले तो दो महीने में तीन चार बार पार्लर जाती थी और इस महीने में एक बार भी नहीं गई थी। उसने जवाब दिया कि पार्लर फिजूलखर्ची है। जितनी रौनक चेहरे पर पांच बार वुज़ू करने, नमाज़ और तिलावत से आती है किसी चीज़ से नहीं आती। अगर ज्यादा जरूरत हो तो घरेलू उपयोग की वस्तुओं से ही चेहरे पर निखार रहता है।
एक दिन में केबल पर ड्रामा देख रहा था तो मेरे छोटे बेटे ने मुझे बिना पूछे टीवी बंद कर दिया और मेरे पास आकर बैठ गया। "बाबा यह बेकार काम है। आप अपने नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का एक कहानी सुनाऊं।"
मुझे गुस्सा तो बहुत आया लेकिन अपने बेटे की ज़बानी जब कहानी सुना तो मेरा दिल भर आया। "यह तुम्हें किसने बताया," मैंने पूछा।
"हमारी उस्तानी ... वह कुरान पढ़ाने के बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और सहाबा के बारे में बताती हैं।" अपने घर और पत्नी बच्चों के तेजी से बदलते हालत देख कर हैरान हो रहा था कि एक दिन पत्नी ने कहा कि केबल कटवादें। कोई नहीं देखता और वैसे भी फिजूलखर्ची और ऊपर से गुनाह है। कुछ दिन बाद पत्नी ने खरीदारी पर जाने को कहा तो मैं फ़ौरन तैयार हो गया, वह काफी दिनों बाद खरीदारी का कहा था वरना पहले तो आए दिन बाजार जाना रहता था।
"क्या खरीदना है?" मैंने पूछा। '' बुर्का ..... !! '' क्या ?? मैं हंसा तो वह बोली,
'' पहले कितने ही गैर शरई काम करती थी, आपने कभी मजाक नहीं उड़ाया था, अब अच्छा काम करना चाहती हूं तो आप मजाक सूझ रहा है। ''कुछ न बोला।
फिर कुछ दिन बाद उसने मुझे काफी सारे पैसे दिए और कहा फ्रिज की बाकी कीमत अदा कर दें। ताकि अधिक किश्तें न देनी पड़े। "इतने रुपए की बचत कैसे हो गई?"
"बस हो गया", वह मुस्कुराई "जब इंसान अल्लाह के बताए हुए हुक्मों पर चलने लगे तो बरकत खुद बखुद हो जाती है.यह भी वे किराएदार महिला ने बताया है ''
सकून मेरे अंदर तक फैल गया.मेरी पत्नी अब न मुझे कभी लड़ी, न शिकायत की। बच्चों को वे घर में पढ़ा देती है। खुद बच्चों के साथ कुरान ताजवीड से पढ़ना सीख रही थी, वह खुद नमाज़ पढ़ने लगी थी, और बच्चों को सख्ती से नमाज़ पढ़ने भेजा। मुझे एहसास होने लगा कि निजात का रास्ता यही तो है। पैसा और सजावटी आराम नहीं है। सकून तो बस अल्लाह की याद में है।
मुझे उस दिन दो हजार किराया थोड़ा लग रहा था, आज सोचता हूँ तो लगता है कि वह तो इतना अधिक था कि आज मेरा घर सकून से भर गया है।
एक सेकंड लगेगा शेयर करने में शेयर करदें ताकि कोई नसीहत हासिल करले
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शनिवार, 13 अगस्त 2016

क्या सच में हाजियों को सुवर का लोगो वाला बैग दिया जा रहा है हज़ पर जाने के लिए पढ़े सच

Posted by Unknown 2 Comments

आजकल व्हाट्स एप्प पर एक मैसेज इस फोटो के साथ बहुत फॉरवर्ड हो रहा है कि हज कमेटी ने इस बार हाजियो को सामन ले जाने के लिये जो बैग दिए है उनपर सुअर बना हुआ है। तो दोस्तों ये महज एक अफवाह है क्योंकि इस साल हज कमेटी ने हाजियो को सिवाय एक हैंड बैग के कोई दूसरा बैग नहीं दिया है और साथ ले सामन ले जाने के लिये बड़े बैग हाजियो को बाज़ार से खरीदना है।

एक अपील है सभी से की सोशल मीडिया और व्हाट्स एप्प पर कोई भी खबर पोस्ट करने और आगे फॉरवर्ड करने से पहले उस खबर की तस्दीक कर ले गर नहीं कर पाते है तो अपनी फोटो के साथ मस्त शायरियां चेपते रहो लेकिन कम से कम झूठी अफवाह न फैलाओ।

हाजियों के बैग पर सूअर का निशान कोरी अफवाह
Aug 11, 2016, 21:58 IST

लखनऊ। हाजियों के बैग पर सूअर की आकृति होने संबंधित अफवाह फैलने से उत्तर प्रदेश हज कमेटी के अफसरों के बीच सनसनी फैल गई है। हज कमेटी की ओर से इस अफवाह का खंडन जारी करते हुए इसको कुछ लोगों की शरारत करार दिया गया है।

उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति के उप कार्यपालक अधिकारी एवं हज ऑफीसर तनवीर अहमद ने सोशल मीडिया पर कुछ अज्ञात लोगों द्वारा हज यात्रियों के सूटकेस/बड़े हैंडबैग पर किसी पशु के चेहरे की आकृति होने को लेकर वायरल की जा रही जानकारी को भ्रामक और सत्य से परे बताया।

उन्होंने इसका खंडन किया है। इस ख़बर में एक सूटकेस बड़े हैंडबैग पर किसी पशु की आकृति बनी हुई दिखाई जा रही है और इस तस्वीर को एक लाल गोले में घेर कर यह ख़बर दी जा रही कि यह सुअर की आकृति है और यह सूटकेस हज कमेटी द्वारा हज यात्रियों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

तनवीर ने बताया कि यह ख़बर निराधार और भ्रामक है। इसे जानबूझकर एक साजिश के तहत कुछ लोगों द्वारा अफवाह के रूप में फैलाया जा रहा है।

तनवीर अहमद ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल किये जा रहे सूटकेस, जिस पर किसी पशु की तस्वीर बनी हुई दिखायी जा रही है वह ‘एरिस्टोक्रेट’ कम्पनी का है जिसे हो सकता है किसी हाजी ने निजी तौर पर खरीदा हो और उसमें अपना सामान ले जा रहा हो।

उन्होंने कहा कि हज कमेटी की ओर से एक छोटा हैण्डबैग हाजियों को बांटा जा रहा है जिसे यात्रा के दौरान उन्हें अपने हाथ में रखना होगा। इस बैग पर हाजी का नाम, कवर नम्बर, पासपोर्ट नम्बर और अन्य विवरण एक कवर के साथ लगाये जाते हैं। इस बैग में पासपोर्ट, जरूरी कागजात और करेन्सी रखी जाती है। इस पर किसी पशु अथवा पक्षी की तस्वीर नहीं बनी होती है।

हज अधिकारी ने प्रदेश के हज यात्रियों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर यकीन न करें और अपनी यात्रा के दौरान अपना सामान ले जाने के लिये बड़े बैग बाजार से ख़रीदे।

@ज़ैद BBM



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शनिवार, 6 अगस्त 2016

एक औरत जो पेड़ पर पढ़ रही नमाज़ लोगो ने कहा जिन्न है पर सच आया सबके सामने

Posted by Unknown

 उत्तरप्रदेश के जौनपुर का एक वीडियो देश भर में वायरल हुआ। इस वीडियो में एक लड़की नीम के पेड़ पर नमाज पढ़ती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के साथ कई कहानियां भी जुड़ती चली गईं। किसी ने कहा यह अल्लाह की भेजी हुई है, तो किसी ने कहा कि यह जिन्न है या इस लड़की में जिन्न सवार होता है। दावा किया गया कि लड़की रोज इस पेड़ पर नमाज पढ़ती है और किसी ने इसे कभी उतरते या चढ़ते नहीं देखा। नमाज पढ़ने के बाद लड़की गायब हो जाती है।  यूपी पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया है। जौनपुर के केराकट थाने के सब इंस्‍पेक्‍टर त्रिलोकी सिंह ने बताया कि यह वीडियो करीब तीन महीने पुराना है। इस महिला का नाम कुमारी शबीना बताया जा रहा है, जो मेह नगर आजमगढ़ की रहने वाली है। वह शेखजादव मुहल्‍ले के रहने वाले निजामुद्दीन के घर में शादी में शरीक होने आईं थीं। उसी दौरान उन्‍होंने पेड़ पर चढ़कर नमाज अता की। पेड़ पर महिला को चढ़कर नमाज पढ़ते हुए देखने के बाद कुछ लड़कों ने उनका वीडियो बना लिया था। तीन महीने बाद यह वीडियो वायरल हो गया और तरह तरह की अफवाहें बनने लगीं, जबकि लड़की अपने गांव वापस लौट गई है। यह सबकुछ एक दिन हुआ था, इसके बाद कभी नहीं हुआ। लड़की अपने घर में सुरक्षित है और वह ऊंचाई पर अपना बेलेंस बनाने में माहिर है। अक्सर पेड़ पर चढ़कर नमाज अदा कर लेती है।
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शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

हज़ पर जाने वाले यात्री इस बात का ख्याल जरूर रखे ताकि आपको सऊदी अरब में कोई परेशानी न हो

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हज मे मोबाइल सिम कार्ड

इस बार हज कमेटी मोबाइल सिम सउदी कानून की वज़ह से नहीं दे पा रही हैं ये मार्केट से खरीदना पड़ेगी

*मोबाइल सिमकार्ड के लिये ये काग़ज़ जमा करना होंगे*

1  पासपोर्ट की फोटोकॉपी

2  हज वीजा की फोटोकापी

*( ये दोनो की फोटोकॉपी अपने हाथ वाले बेग मे साथ लेकर जायें)*

3  बॉर्डर कंट्रोल नम्बर (رقم الدخول )  ये नम्बर सउदी पहुँचने पे वहाँ की हुकूमत वीसा के अगले पेज पे लिखेंगी

4. आपकी फिंगर प्रिंट

5.एयर पोर्ट से सिम लेने वाले हाजियो से गुज़ारिश हे क़ि
सिम कार्ड के पीछे सिमकार्ड  का ID नम्बर लिखवा लें,सिम के ID नम्बर डाले बिना सिमकार्ड  नहीं चलेगी न ही रिचार्ज होगा।

मोबाइल की सिम ऐयरपोर्ट पे ही सिम के काऊँटर से ले लीजये
वरना मक्का शरीफ पहुँचने के बाद आपका पासपोर्ट मोल्लीम के पास जमा हो जायेगा तो आपको दिक्कत आयेगी।
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बुधवार, 3 अगस्त 2016

जब दुश्मनो ने मेरे आक़ा के चेहरे मुबारक पर पत्थर मारा और मेरे आक़ा एक खड्डे में गिरे तब भी आक़ा ने किसी को बद्दुआ नहीं दिए और हम आज

Posted by Unknown

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आज भी उस मन्ज़र को मैं याद करता हूँ तो मेरे आँखों से आंसू निकल आते है
जब मेरे आक़ा 2आलम के मुख्तार नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम पर दुश्मनो ने हमला किया था

जंगे उहद जोर और शोर से चल रही है रसुलल्लाह अपने सहाबा के साथ दुश्मनो के बीच में है एक दुश्मन रसूलल्लाह के चेहरे पर पत्थर मारता है और वो सहाबा ए किराम के दरमियान से निकलकर रसूलल्लाह के चेहरे पर लग जाता है आप उस पत्थर के जोर से पीछे खड्डे में गिर जाते है आपके सर के पिछले हिस्से को भी मार लग जाती है चेहरा खून से आलूद हो जाता है 2 दांत शहीद हो जाते हैं
सहाबा ए किराम आपको खड्डे से निकालकर आपसे कहते है के ऐ  अल्लाह के रसूल अब तो इन काफिरों के लिए बद्दुआ किजिये रसूलल्लाह फ़ौरन दुआ के लिए हाथ उठाते हैं !

और कहते हैं ऐ अल्लाह ये मुझे जानते नहीं है तू उनको हिदायत दे!
देखिये हम इनके नामलेवा है जिन्होने अपने दुश्मनो को भी गले से लगाया कभी बद्दुआ तक नहीं की और हम हर छोटी बात एक दूसरे को नंगा करने और बेइज़्ज़त करने में लग जाते हैं ! !
सुब्हान अल्लाह !!
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मंगलवार, 26 जुलाई 2016

अस्हाबे फील यानि हांथी वालो का किस्सा -जब खाना काबा को गिराने के लिए ईसाइयों ने कसम खाई

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#अस्हाबे_फ़ील (हाथी वालों का) क़िस्सा

    हुज़ूर अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पैदाईश से 50 या 55 दिन पहले यह वाक़िआ हुआ कि नजाशी हब्शा (इथोपिया के बादशाह) की तरफ़ से यमन देश का गवर्नर (हाकिम) अब्रहा अश्रम था, जो ईसाई मज़हब का मानने वाला था...। उसने देखा कि अरब देश के सभी आदमी मक्का आकर ख़ाना काबा का तवाफ़ (एक इबादत, जो काबा शरीफ़ के चक्कर लगाकर अदा होती है) करते हैं, तो उसने चाहा कि ईसाई मज़हब के नाम पर एक बहुत बड़ी व सुन्दर इमारत (चर्च) बना दूँ ताकि अरब के लोग ख़ाना काबा को छोड़कर उस ख़ूबसूरत बनावटी काबे का आकर तवाफ़ करने लगें...।

   चुनाँचे यमन देश की राजधानी 'सनआ' में उसने एक बहुत आलीशान चर्च (गिरजा) बनाया...। अरब देश में जब यह ख़बर मशहूर हुई तो क़बीला किनाना का कोई आदमी वहाँ आया और उसमें पाख़ाना करके भाग आया...।
 बाज़ लोग कहते हैं कि अरब के नौजवानों ने उसके क़रीब आग जला रखी थी, हवा से उड़कर आग चर्च में लग गई और वह इमारत जलकर ढेर हो गई...।

अब्रहा को जब यह ख़बर मिली तो उसने ग़ुस्से में आकर क़सम खाई कि ख़ाना-ए-काबा (बैतुल्लाह) को ढहा कर ही दम लूँगा...। इसी इरादे से मक्का पर 60 हज़ार की फ़ौज लेकर हमले के इरादे से चल दिया...। रास्ते में जिस अरब क़बीले ने रुकावट डाली उसको ख़त्म कर दिया, तायफ़ के एक कबीले (#क़बीला_बनू_सक़ीफ़) ने उससे कोई जंग नहीं की बल्कि अपने क़बीले से #अबू_रग़ाल को साथ भेजा ताकि वो मक्का का रास्ता अब्रहा के लश्कर को बता सके, अबू रग़ाल रास्ता बताता हुआ अब्रहा और उसके लश्कर को मक्का ले आया, यहाँ तक कि मक्का की सरहद में दाख़िल हुआ...। अबू रग़ाल को अल्लाह के अजाब ने वहीं पकड़ लिया और वहीं मर गया... उस दौर में हाजी जब हज करने जाते थे तो क़बीला बनू सक़ीफ़ के अबू रग़ाल की कब्र पर पत्थर मारते और लानत भेजते थे...। अब्रहा के लश्कर में 13 हाथी भी थे और एक बहुत बड़े हाथी (जिसका नाम महमूद था और उसको चलाने वाले का नाम उनैस था) उस पर ख़ुद सवार था, मक्का के क़रीब पड़ाव डाला...।

मक्का के आस-पास मक्का वालों के जानवर चरा करते थे, वे जानवर अब्रहा के लश्कर वालों ने पकड़ लिये, जिन में 200 ऊँट हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दादा हज़रत अब्दुल-मुत्तलिब के भी थे, जो उस वक़्त मक्का के सरदार और ख़ाना काबा (बैतुल्लाह शरीफ़ की मस्जिद) के मुतवल्ली (प्रबंधक और देखभाल करने वाले) थे...।

  जब उनको अब्रहा के हमले की ख़बर हुई तो क़ुरैश को जमा करके कहा कि घबराओ मत, मक्के को ख़ाली कर दो, ख़ाना काबा को कोई नहीं गिरा सकता, यह अल्लाह का घर है और वह ख़ुद इसकी हिफ़ाज़त करेगा...। उसके बाद अब्दुल-मुत्तलिब क़ुरैश के चन्द बड़े लोगों को साथ लेकर अब्रहा से मिलने और अपने ऊँट माँगने गये...। अब्रहा ने अब्दुल-मुत्तलिब का शानदार इस्तिक़बाल (स्वागत) किया...।

अल्लाह तआला ने अब्दुल-मुत्तलिब को बेमिसाल हुस्न व वक़ार (प्रभावी व्यक्तित्व) और दबदबा (रौब, शान व शौकत) दिया था, जिसको देखकर हर आदमी मरऊब हो जाता (असर मानता) था...।

  अब्रहा भी हज़रत अब्दुल-मुत्तलिब को देखकर मरऊब हो गया और बहुत इज़्ज़त के साथ पेश आया...। यह तो मुनासिब न समझा कि उनको अपने तख़्त पर बैठाये, अलबत्ता उनकी इज़्ज़त की ख़ातिर यह किया कि ख़ुद तख़्त से उतर कर फ़र्श (ज़मीन) पर उनके पास बैठ गया...। बातचीत के दौरान हज़रत अब्दुल-मुत्तलिब ने अपने ऊँटो की रिहाई का मुतालबा (सवाल) किया...।

अब्रहा ने हैरान होकर कहा बड़े ताज्जुब (अचंभे) की बात है कि आपने मुझसे अपने ऊँटो के बारे मे तो सवाल किया और ख़ाना काबा जो आप और आपके बाप दादाओ के मज़हब और दीन की निशानी है, जिसको मैं गिराने के लिये आया हूँ उसकी आपको कोई फ़िक्र (परवाह) नहीं..?
अब्दुल-मुत्तलिब ने जवाब दिया कि मैं अपने ऊँटो का मालिक हूँ इसलिये मैंने अपने ऊँटो का सवाल किया, और काबे का मालिक ख़ुदा है, वह ख़ुद अपने घर को बचायेगा...।

   अब्रहा ने कुछ ख़ामोशी के बाद अब्दुल-मुत्तलिब के ऊँट वापस देने का हुक्म दिया...। अब्दुल-मुत्तलिब अपने ऊँट लेकर वापस आ गये और क़ुरैश और मक्का वालों को हुक्म दिया कि मक्का ख़ाली कर दे और तमाम ऊँट जो अब्रहा से वापस मिले थे ख़ाना काबा के लिये वक़्फ़ (दान) कर दिये...।
हज़रत अब्दुल-मुत्तलिब चन्द आदमियों को साथ लेकर ख़ाना काबा पहुँचे और हज़रत आमना को जो हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की माँ है, उनको भी पास बैठाकर अल्लाह से दुआ माँगी:-

    ऐ अल्लाह! इनसान अपनी जगह की हिफ़ाज़त करता है तू अपने घर की हिफ़ाज़त फ़रमा, और अहले सलीब (ईसाइयों) के मुक़ाबले में अपने घर की ख़िदमत करने वालों की मदद फ़रमा...। उनकी सलीब (ईसाइयों के क्रास का मज़हबी निशान) और उनकी तदबीर कभी भी तेरी तदबीर पर ग़ालिब (हावी) नहीं आ सकती...। लश्कर और हाथी चढ़ाकर लाये है ताकि तेरे अयाल (कुनबे वालों, यानी तेरे घर के पास रहने वालों) को क़ैद कर ले, तेरे हरम (इज़्ज़त वाले घर) की बर्बादी का क़स्द (इरादा) करके आये हैं, जहालत (बेइल्मी, नादानी व बेवक़ूफ़ी) की बिना पर तेरी अज़मत और जलाल (बड़ाई और बुज़ुर्गी) का ख़्याल नहीं किया...।

अब्दुल-मुत्तलिब दुआ से फ़ारिग़ होकर अपने साथियों के साथ पहाड़ पर चढ़ गये और अब्रहा अपना लश्कर और हाथी लेकर ख़ाना काबा को गिराने के इरादे से आगे बढ़ा...।

  हरम की हद में पहुँचकर हाथी रुक गये और काबे की ताज़ीम (सम्मान व इज़्ज़त) में तमाम हाथियों ने अपना सर झुका लिया...। हज़ार कोशिशों के बावजूद भी हाथी आगे न बढ़े...। उनको किसी दूसरी तरफ़ को चलाया जाता तो दौड़ने लगते, लेकिन काबे की तरफ़ को चलाते तो एक इन्च भी आगे न बढ़ते, बल्कि अपना सर झुका लेते...।
  यह मंज़र (नज़ारा और द्र्श्य) देखकर अब्रहा हाथी से उतरा और हाथियों को वहीं छोड़कर फ़ौज को आगे बढ़ने का हुक्म दिया...।

अचानक अल्लाह के हुक्म से छोटे-छोटे परिन्दो के झुंड के झुंड नज़र आये, हर एक की चोंच और पंजो में छोटी-छोटी कंकरियाँ थीं जो लश्कर पर बरसने लगीं...।
 ख़ुदा की क़ुदरत से वे कंकरियाँ गोली का काम दे रही थीं... सर पर गिरती और नीचे से निकल जाती थीं, जिस पर वह कंकरी गिरती वह ख़त्म हो जाता था...। ग़र्ज़ कि अब्रहा का लश्कर तबाह व बर्बाद हुआ और खाए हुए भुस की तरह हो गया...।
अब्रहा के बदन पर चेचक के दाने निकल आये जिससे उसका तमाम बदन सड़ गया, बदन से पीप और लहू (ख़ून) बहने लगा...। एक के बाद एक बदन का हिस्सा कट-कटकर गिरने लगा और अब्रहा बदन में घटते-घटते म़ुर्गे के चूज़े के बराबर हो गया और उसका सीना फटा और दिल बाहर निकल कर गिरा और मर गया...।
जब सब मर गये तो अल्लाह तआला ने एक सैलाब भेजा जो सबको बहाकर दरिया में ले गया...।

इस वाक़िए को क़ुरआने पाक में सूर: फ़ील में बयान किया गया है:-

शुरु करता हूँ अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान, बड़ा रहम वाला है...।

क्या आपको मालूम नहीं कि आपके रब ने हाथी वालों के साथ क्या मामला किया? (1) क्या उनकी तदबीर को (जो कि काबा शरीफ़ को वीरान करने के बारे मे थी) पूरी तरह ग़लत नहीं कर दिया? (2) और उन पर गिरोह के गिरोह परिन्दे भेजे (3) जो उन लोगों पर कंकर की पत्थरियाँ फेंकते थे। (4) सो अल्लाह तआला ने उनको खाये हुए भूसे की तरह (पामाल) कर दिया...। (5)

Tanveer Tyagi
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सोमवार, 25 जुलाई 2016

सुपुर्द ख़ाक हो गए 1911 में जन्मे हाजी नसीर उद्दीन: कड़ा कौशाम्बी खबर

Posted by Unknown

कौशाम्बी- सुपर्द खाक हुए समाज सेवी हाजी नसीर उद्दीन
कौशांबी कड़ा के बसवारी गाँव में 1911ई में जन्मे समाज सेवी हाजी नसीर उद्दीन उम्र लगभग 105 साल जिनका इंतेक़ाल रविवार रात 8,00बजे हुवा जिनकी मिटटी सोमवार दोपहर 2 बजे हुई हाजी नसीर का शिक्षा के छेत्र में बहुत ही बड़ा योगदान रहा है उन्हों ने अपना पूरा जीवन गरीबों के बच्चों को शिक्षा दिलाने और स्कूल भेजने में किया और सौराई बुज़ुर्ग के चूहा पीरन के जंगल में 1959 में मदरसा खोल जिसमे आज भी कक्षा 8 तक की दीनी और दुनियाबी पढ़ाई मुफ्त होती है उनके मिटटी में पूर्व सांसद शेलेन्द्र कुमार कैलाश केसरवानी माजिद अली महेंदर सिंह यादव जिला पंचायत सदस्य जुबेर घोसी नजमी यासीन सीताराम पाल के अलावा आस पास इलाके के काफी लोग मौजूद थे
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गुरुवार, 21 जुलाई 2016

एक बड़ा सवाल जब हासिम अंसारी के इंतकाल पर उसी अयोध्या और रामगढ़ी के महन्त एवम उनके साथ आये हर मंदिर के साधु संतों के आँसू क्यों छलक पड़ें.... क्यों रोकर उन्होंने कहा के हमने अपना एक अच्छा दोस्त और साथी खोदिया....

Posted by Unknown
"ऐ  काश  अपने  मुल्क की ऐसी फ़ज़ा बने
मंदिर  जले  तो  दर्द मुसलमान को भी हो
मस्जिद की अस्मिता पे कोई आँच न आये
ये  फ़िक्र मंदिरों के निगहबान को भी हो.।"

जिस बाबरी मस्जिद और अयोध्या मंदिर के झगड़े
ने आज़ादी के बाद हिन्दू और मुस्लिमों के बीच सबसे
बड़ी खायी का काम किया....
कल उसी बाबरी मस्जिद मुक़दमे के मुख्य वादी हाशिम
अंसारी के जनाज़े में ...मुसलमानों के साथ साथ अयोध्या
के साधू संतों की भी आँखें  क्यों नम थीं....?

एक बड़ा सवाल ...

आख़िर एक मुस्लिम के जनाज़े में ..
वो भी जो पूरी ज़िन्दगी बाबरी मस्जिद मुक़दमे का मुख्य
वादी रहा हो....उसके इंतकाल पर उसी अयोध्या और रामगढ़ी
के महन्त एवम उनके साथ आये हर मंदिर के साधु संतों के
आँसू क्यों छलक पड़ें.... क्यों रोकर उन्होंने कहा के हमने अपना एक अच्छा दोस्त और साथी खोदिया....

                               
क्या वजह होसकती है..?    

नयी पीढ़ी और ख़ासकर
ज़हर उगलने वाले सियासी भेड़ियों को इस बात पर
सोचने की ज़रूरत है....

यही है हमारी तहज़ीब...यही है हमारा हिन्दुस्तान..

इस मुल्क की यही तहज़ीब रही है के अगर किसी जब्बार का इंतकाल होता था तो पड़ोस का गंगादीन तब तक क़ब्रस्तान
में एक किनारे हाथ बांधे खड़ा रहता था जब तक के मय्यत को दफ़ना नहीं दिया जाता था....

इस मुल्क की यही तहज़ीब रही है के जब कोई ज़ुबैदा अपनी ससुराल के लिये रूख़सत होती थी तो अपने बाप के कंधे से लगकर रोना भूल जाती थी लेकिन पड़ोस के अलगू काका से लिपटकर रोना नहीं भूलती थी....

हो सके तो इस तहज़ीब और देश को बचा लो
वरना तुम्हारी आने वाली नसलें तुम्हारी तहज़ीब को
सिर्फ़ इतिहास में पढ़ेंगी....

(नाम आँखों से...ख़ीराजे अक़ीदत)

#shahzadakaleem की कलम से
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मंगलवार, 19 जुलाई 2016

हासिम अंसारी अब हमारे बीच नहीं रहे हुआ आज सुबह 5:30AM पर इंतेक़ाल 1949 से बाबरी मस्जिद का लड़ रहे थे केस

Posted by Unknown

अयोध्या,बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी का इंतकाल
   अयोध्या, बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अनसारी का आज उनके अयोध्या आवास पर सुबह 5.30 पर देहावसान हो गया, वे 96 वर्ष के थे और कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे,  हासिम अंसारी  96 साल के थे ।इनके पिता का नाम करीम बख्श था। राम जन्मभूमि का मुकदमा 1949 में इन्होंने खुद दायर किया था । इनके परिवार में एक लड़का और 1 बेटी है । लड़का इक़बाल ऑटो चलाकर घर का खर्चा चलता था ।
     रामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद आंदोलन में इनकी अहम भूमिका रही है ।
अपने जीते जी ये राममन्दिर/बाबरी मस्जिद का समाधान चाहते थे
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सोमवार, 18 जुलाई 2016

मरी गाय से भरी 3 ट्रक को लेजाकर कलेक्टर ऑफिस के सामने खड़ी किया और कहा ये है तुम्हारी माता इनका तुम संस्कार करो

Posted by Unknown 22 Comments
अभी हाल ही में मरी गाय की खाल निकलने पे गऊ रक्षा दल ने 4 दलितों की पिटाई की थी
उसी वजह से दलितों के दिल में आक्रोश भरा हुआ है
और इससे पहले मुस्लिमो को भी ऐसे ही पीटा गया

सुरेन्द्रनगर में मरे हुए ढोरों से भरी तीन ट्रकों लेकर आज दलितों ने कलेक्टर ओफीस पर धावा बोल दिया 

कहा लो ये तुम्हारी गौ माताएं. इसका अग्नि संस्कार करो तुम.


अगर ऐसा ही होता रहा तो गऊ रक्षा दल पर बैन लग सकता है
क्यू की सरकार के पास इंसानो का अंतिम संस्कार करने का पैसा नहीं जानवरो का अंतिम संस्कार कैसे करेगी
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