एक अरबी हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दरबार में हाज़िर हुआ और अ़र्ज किया या रसूलल्लाह! मैं कुछ पूछना चहता हूँ... सरकार ने फरमाया कहो...।
अर्ज़ किया: मैं अमीर बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: क़नाअत इखि्तयार करो अमीर हो जाओगे...।
अर्ज़ किया: मैं सबसे बडा आलिम बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: त़कवा इख्तियार करो आलिम बन जाओगे...।
अर्ज़ किया: इज्ज़त वाला बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: मख़लू़क के सामने हाथ फैलाना बन्द कर दो...।
अर्ज़ किया: अच्छा आदमी बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: लोगों को फायदा पहुंचाओ...।
अर्ज़ किया: आदिल बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: जिसे अपने लिये अच्छा समझते हो वही दूसरों के लिये पसंद करो...।
अर्ज़ किया: ताक़तवर बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करो...।
अर्ज़ किया: अल्लाह के दरबार में खास दर्जा चाहता हूँ...।
फ़रमाया: कसरत से जिक्र ए इलाही करो...।
अर्ज़ किया: रिज्क़ में कुशादगी चाहता हूँ...।
फ़रमाया: हमेशा बावजू रहो...।
अर्ज़ किया: दुआओं की क़बुलियत चाहता हूँ...।
फ़रमाया: हराम न खाओ...।
अर्ज़ किया: ईमान की तकमील चाहता हूँ...।
फ़रमाया: अख्लाक़ अच्छे कर लो...।
अर्ज़ किया: क़यामत के दिन अल्लाह से गुनाहों से पाक होकर मिलना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: ज़नाबत के फौरन बाद गुस्ल किया करो...।
अर्ज़ किया: गुनाहों में कमी चाहता हूँ...।
फ़रमाया: कसरत से तौबा करो...।
अर्ज़ किया: क़यामत के रोज़ नूर में उठना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: जु़ल्म करना छोड़ दो...।
अर्ज़ किया: मैं चाहता हूँ कि अल्लाह मेरी पर्दापोशी करे...।
फ़रमाया: लोगों की पर्दापोशी करो...।
अर्ज़ किया: रुस्वाई से बचना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: जिना से बचो...।
अर्ज़ किया: चाहता हूँ अल्लाह और उसके रसूल का महबूब बन जाऊँ...।
फ़रमाया: जो अल्लाह और उसके रसूल का महबूब हो, उसे अपना महबूब बना लो...।
अर्ज़ किया: अल्लाह का फ़रमाबरदार बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: फ़राइज़ का एहतिमाम करो...।
अर्ज़ किया: एहसान करने वाला बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: अल्लाह की यूँ बन्दगी करो जैसे तुम उसे या वह तुम्हें देख रहा हो...।
अर्ज़ किया: या रसूलल्लाह! क्या चीज़ गुनाहों से माफी दिलाएगी..?
फ़रमाया: अाँसू, आजिजी़ और बीमारी...।
अर्ज़ किया: क्या चीज़ दोज़ख़ की अाग को ठन्डा करेगी..?
फ़रमाया: दुनिया की मुसीबतों पर सब्र...।
अर्ज़ किया: अल्लाह के गुस्से को क्या चीज़ ठन्डा करेगी..?
फ़रमाया: चुपके-चुपके सदक़ा और सिला रहमी...।
अर्ज़ किया: सबसे बडी बुराई क्या है..?
फ़रमाया: बुरे अख्लाक़ और बुख्ल (कंजुसी!)...।
अर्ज़ किया: सबसे बड़ी अच्छाई क्या है..?
फ़रमाया: अच्छे अख्लाक़, तवज्जोह अौर सब्र...।
अर्ज़ किया: अल्लाह के गज़ब से बचना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: लोगों पर गुस्सा करना छोड दो...।
Tanveer Tyagi #BBM
मंगलवार, 27 सितंबर 2016
पूरे जिन्दगी के मसाइल का हल सिर्फ एक हदीस में जरूर पढ़े
Posted by Unknown in: इस्लामिक
एक अरबी हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दरबार में हाज़िर हुआ और अ़र्ज किया या रसूलल्लाह! मैं कुछ पूछना चहता हूँ... सरकार ने फरमाया कहो...।
अर्ज़ किया: मैं अमीर बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: क़नाअत इखि्तयार करो अमीर हो जाओगे...।
अर्ज़ किया: मैं सबसे बडा आलिम बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: त़कवा इख्तियार करो आलिम बन जाओगे...।
अर्ज़ किया: इज्ज़त वाला बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: मख़लू़क के सामने हाथ फैलाना बन्द कर दो...।
अर्ज़ किया: अच्छा आदमी बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: लोगों को फायदा पहुंचाओ...।
अर्ज़ किया: आदिल बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: जिसे अपने लिये अच्छा समझते हो वही दूसरों के लिये पसंद करो...।
अर्ज़ किया: ताक़तवर बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करो...।
अर्ज़ किया: अल्लाह के दरबार में खास दर्जा चाहता हूँ...।
फ़रमाया: कसरत से जिक्र ए इलाही करो...।
अर्ज़ किया: रिज्क़ में कुशादगी चाहता हूँ...।
फ़रमाया: हमेशा बावजू रहो...।
अर्ज़ किया: दुआओं की क़बुलियत चाहता हूँ...।
फ़रमाया: हराम न खाओ...।
अर्ज़ किया: ईमान की तकमील चाहता हूँ...।
फ़रमाया: अख्लाक़ अच्छे कर लो...।
अर्ज़ किया: क़यामत के दिन अल्लाह से गुनाहों से पाक होकर मिलना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: ज़नाबत के फौरन बाद गुस्ल किया करो...।
अर्ज़ किया: गुनाहों में कमी चाहता हूँ...।
फ़रमाया: कसरत से तौबा करो...।
अर्ज़ किया: क़यामत के रोज़ नूर में उठना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: जु़ल्म करना छोड़ दो...।
अर्ज़ किया: मैं चाहता हूँ कि अल्लाह मेरी पर्दापोशी करे...।
फ़रमाया: लोगों की पर्दापोशी करो...।
अर्ज़ किया: रुस्वाई से बचना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: जिना से बचो...।
अर्ज़ किया: चाहता हूँ अल्लाह और उसके रसूल का महबूब बन जाऊँ...।
फ़रमाया: जो अल्लाह और उसके रसूल का महबूब हो, उसे अपना महबूब बना लो...।
अर्ज़ किया: अल्लाह का फ़रमाबरदार बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: फ़राइज़ का एहतिमाम करो...।
अर्ज़ किया: एहसान करने वाला बनना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: अल्लाह की यूँ बन्दगी करो जैसे तुम उसे या वह तुम्हें देख रहा हो...।
अर्ज़ किया: या रसूलल्लाह! क्या चीज़ गुनाहों से माफी दिलाएगी..?
फ़रमाया: अाँसू, आजिजी़ और बीमारी...।
अर्ज़ किया: क्या चीज़ दोज़ख़ की अाग को ठन्डा करेगी..?
फ़रमाया: दुनिया की मुसीबतों पर सब्र...।
अर्ज़ किया: अल्लाह के गुस्से को क्या चीज़ ठन्डा करेगी..?
फ़रमाया: चुपके-चुपके सदक़ा और सिला रहमी...।
अर्ज़ किया: सबसे बडी बुराई क्या है..?
फ़रमाया: बुरे अख्लाक़ और बुख्ल (कंजुसी!)...।
अर्ज़ किया: सबसे बड़ी अच्छाई क्या है..?
फ़रमाया: अच्छे अख्लाक़, तवज्जोह अौर सब्र...।
अर्ज़ किया: अल्लाह के गज़ब से बचना चाहता हूँ...।
फ़रमाया: लोगों पर गुस्सा करना छोड दो...।
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