उत्तरप्रदेश के जौनपुर का एक वीडियो देश भर में वायरल हुआ। इस वीडियो में एक लड़की नीम के पेड़ पर नमाज पढ़ती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के साथ कई कहानियां भी जुड़ती चली गईं। किसी ने कहा यह अल्लाह की भेजी हुई है, तो किसी ने कहा कि यह जिन्न है या इस लड़की में जिन्न सवार होता है। दावा किया गया कि लड़की रोज इस पेड़ पर नमाज पढ़ती है और किसी ने इसे कभी उतरते या चढ़ते नहीं देखा। नमाज पढ़ने के बाद लड़की गायब हो जाती है। यूपी पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया है। जौनपुर के केराकट थाने के सब इंस्पेक्टर त्रिलोकी सिंह ने बताया कि यह वीडियो करीब तीन महीने पुराना है। इस महिला का नाम कुमारी शबीना बताया जा रहा है, जो मेह नगर आजमगढ़ की रहने वाली है। वह शेखजादव मुहल्ले के रहने वाले निजामुद्दीन के घर में शादी में शरीक होने आईं थीं। उसी दौरान उन्होंने पेड़ पर चढ़कर नमाज अता की। पेड़ पर महिला को चढ़कर नमाज पढ़ते हुए देखने के बाद कुछ लड़कों ने उनका वीडियो बना लिया था। तीन महीने बाद यह वीडियो वायरल हो गया और तरह तरह की अफवाहें बनने लगीं, जबकि लड़की अपने गांव वापस लौट गई है। यह सबकुछ एक दिन हुआ था, इसके बाद कभी नहीं हुआ। लड़की अपने घर में सुरक्षित है और वह ऊंचाई पर अपना बेलेंस बनाने में माहिर है। अक्सर पेड़ पर चढ़कर नमाज अदा कर लेती है।
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शनिवार, 6 अगस्त 2016
एक औरत जो पेड़ पर पढ़ रही नमाज़ लोगो ने कहा जिन्न है पर सच आया सबके सामने
Posted by Unknown in: खास खबरउत्तरप्रदेश के जौनपुर का एक वीडियो देश भर में वायरल हुआ। इस वीडियो में एक लड़की नीम के पेड़ पर नमाज पढ़ती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के साथ कई कहानियां भी जुड़ती चली गईं। किसी ने कहा यह अल्लाह की भेजी हुई है, तो किसी ने कहा कि यह जिन्न है या इस लड़की में जिन्न सवार होता है। दावा किया गया कि लड़की रोज इस पेड़ पर नमाज पढ़ती है और किसी ने इसे कभी उतरते या चढ़ते नहीं देखा। नमाज पढ़ने के बाद लड़की गायब हो जाती है। यूपी पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया है। जौनपुर के केराकट थाने के सब इंस्पेक्टर त्रिलोकी सिंह ने बताया कि यह वीडियो करीब तीन महीने पुराना है। इस महिला का नाम कुमारी शबीना बताया जा रहा है, जो मेह नगर आजमगढ़ की रहने वाली है। वह शेखजादव मुहल्ले के रहने वाले निजामुद्दीन के घर में शादी में शरीक होने आईं थीं। उसी दौरान उन्होंने पेड़ पर चढ़कर नमाज अता की। पेड़ पर महिला को चढ़कर नमाज पढ़ते हुए देखने के बाद कुछ लड़कों ने उनका वीडियो बना लिया था। तीन महीने बाद यह वीडियो वायरल हो गया और तरह तरह की अफवाहें बनने लगीं, जबकि लड़की अपने गांव वापस लौट गई है। यह सबकुछ एक दिन हुआ था, इसके बाद कभी नहीं हुआ। लड़की अपने घर में सुरक्षित है और वह ऊंचाई पर अपना बेलेंस बनाने में माहिर है। अक्सर पेड़ पर चढ़कर नमाज अदा कर लेती है।
मंगलवार, 19 जुलाई 2016
हासिम अंसारी अब हमारे बीच नहीं रहे हुआ आज सुबह 5:30AM पर इंतेक़ाल 1949 से बाबरी मस्जिद का लड़ रहे थे केस
Posted by Unknown in: खास खबरअयोध्या,बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी का इंतकाल
अयोध्या, बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अनसारी का आज उनके अयोध्या आवास पर सुबह 5.30 पर देहावसान हो गया, वे 96 वर्ष के थे और कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे, हासिम अंसारी 96 साल के थे ।इनके पिता का नाम करीम बख्श था। राम जन्मभूमि का मुकदमा 1949 में इन्होंने खुद दायर किया था । इनके परिवार में एक लड़का और 1 बेटी है । लड़का इक़बाल ऑटो चलाकर घर का खर्चा चलता था ।
रामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद आंदोलन में इनकी अहम भूमिका रही है ।
अपने जीते जी ये राममन्दिर/बाबरी मस्जिद का समाधान चाहते थे
शनिवार, 16 जुलाई 2016
गुजरात मे 4 दलित की पिटाई पर अंतर्राष्ट्रीय शायर शहज़ादा कलीम ने प्रधानमंत्री को किया आगाह
Posted by Unknown in: खास खबरआख़िर किसकी नज़र लग गयी हिंदुस्तान को
ऐसे तो नहीं थी अपने मुल्क की आबो हवा .?
झूठी आस्था और खोखले मज़हबी पाखंड के नाम पर जिस तरह नंगा नाच का खेल पुलिस वालों की मौजूदगी में ...पिछले दिनों गुजरात के ऊना ज़िले में गौरक्षा दल ने दलितों के साथ खेला उससे इंसानियत ही नहीं हिंदुस्तान की तहज़ीब भी पूरी दुनियाँ में शर्मसार हुयी है ।
अच्छे दिनों के मसीहा को पूरी दुनियाँ में अपना 56 इंच का सीना चौड़ा कर फ़ख़्र से बताना चाहिए के वो उस देश के प्रधान मंत्री हैं जहाँ झूठी आस्था के नाम पर बीच सड़क पर इंसानों को जानवरों की तरह पुलिस प्रशासन की हाज़री में पीटा जाता है....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ गौ- माँस के नाम पर किसी अख़लाक़ को पीट पीट कर मार दिया जाता है ....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ मुसलमान मुक्त भारत की बात की जाती है, वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ मुहब्बत को भी लव जिहाद का नाम दिया जाता है, वो उस देश के प्रधान मंत्री हैं जहाँ मंदिर मस्जिद और घर वापसी एवं गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों और दलितों को निशाना बनाया जाता है ....वो उस देश के प्रधानमंत्री हैं जहाँ फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद के नाम पर उनके भक्तों द्वारा देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट दिया जाता है ।
कितना तरक़्क़ी कर गया अपना मुल्क इन ढाई सालों में...
जय हो
आगये हमारे अच्छे दिन ....।
लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय,
आपको एक वाक़या याद दिलाना चाहता हूँ ..
राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जब संसद की सीढ़ियों से उतरते हुए पण्डित जवाहर लाल नेहरु के पैर फिसलने पर गिरने से बचा लिया था और ...मुस्कुराकर नेहरु को आगाह किया था के सियासत के क़दम जब भी लड़खड़ाए हैं अदब और साहित्य ने उसे सहारा दिया है .........आज 60 साल बाद फ़िर से वही अदब और साहित्य सियासत के लड़खड़ाते क़दम को देखकर आपको आगाह कर रहा है .....अगर इसी तरह
सरकार ख़ामोश रही तो वो दिन दूर नहीं जब देश सिविलवार (गृहयुद्ध) के ख़तरे का शिकार होजायेगा....
जागिए नींद से हुज़ूर ....
इससे पहले के देश फ़िर से बँट जाये....।
#ShahzadaKaleem
सोमवार, 11 जुलाई 2016
झूटी खबर फ़ैलाने वाली मिडिया क्या सबके सामने माफ़ी मांगेगी : शायर शहज़ादा कलीम
Posted by Unknown in: खास खबर"जिस दिन भी हिचकिचायेगी सच से ये शायरी
काग़ज़ को फाड़ देंगे क़लम तोड़ देंगे हम..।"
लिखता रहूँगा....आख़री साँस तक.........हक़ और
इंसाफ़ की आवाज़ बनकर.....
वरना अलविदा कह दूँगा इस दोगले चेहरे और भड़ैती के अलंबरदारों से सजे मंचों की दुनियाँ को......मेरा ज़मीर इतना भी नहीं गिर गया के घूमता रहूँ लग्ज़री गाड़ियों में ग्लैमर के नशे में डूबकर और मेरी क़ौम.. समाज, देश नफ़रतों के बारूद के मुहाने पर हो.....।
ज़ाकिर नाइक को बदनाम करने की
घिनौनी कोशिश..।
एक अपील....ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कर लोगों तक
पहुँचायें..।
.....
डॉ. ज़ाकिर नाइक को बदनाम करने वाली दोगली मीडिया जिसतरह बिना किसी सुबूत के एक ज़िम्मेदार इंसान को बदनाम करने पर तुली है.....ऐसे वक़्त में जब एक लम्बे
चौड़े मीडिया ट्रायल के बाद आख़िरकार 'दि डेली स्टार'
नामक बंगला देशी अख़बार को कुछ शर्म आई है ....और वो अपने उस न्यूज़ आर्टिकल से पल्लू छुड़ाते हुए जिसमें उसने एक ढाका आतंकी को डॉ ज़ाकिर नाइक से मुतास्सिर बताया था..से पीछे हट गया है ........और भी सुबूत न मिलने पर अपनी इस घिनौनी हरकत के लिए क्या बिकाऊ मीडिया ....डॉ. ज़ाकिर नाइक से पूरी दुनियाँ के सामने
खुले तौर पर माफ़ी मांगेगी..?
ये सवाल है मशहूर शायर शहज़ादा कलीम का
रही बात डॉ. ज़ाकिर नाइक की तो डॉ. ज़ाकिर नाइक कोई लापता इंसान नहीं हैं...महाराष्ट्रा में आपकी सरकार.है..केंद्र में आपकी सरकार....अगर वो क़ुसूरवार हैं तो दर्ज कीजिये उनपर मुक़दमा...और अगर ग़ैर ज़मानती धारा लग रही है तो गिरफ़्तार कीजिये उन्हें कौन रोक रहा है आपको..?
जिस तरह का जाल बना गया ज़ाकिर नाइक इस वक़्त जेल में होते ख़ुदा न ख़ास्ता आज अगर उनके बयान आन दी रिकॉर्ड न होते...क़ानून को अपना काम करने दीजिये सबकुछ सच्चाई सामने आएगी बस इंतज़ार
करिये..।
डॉ ज़ाकिर नाइक के ज़रिये जो खेल खेला जारहा है उससे साफ़ महसूस होता है के एक ख़ास तबक़े का चैन सुकून छीनने की कोशिश की जारही है..। यूपी चुनाव के मद्देनज़र हर बात का राजनीतिक तमाशा मत बनाइये.... कैराना भी खेल लिया, लव जिहाद भी खेल लिया, मुस्लिम मुक्त भारत भी खेल लिया, गऊ माता और घर वापसी भी खेल लिया, अब मुस्लिम धर्म गुरुओं को आतंकवादी बताने का खेल खेला जारहा है..।
चैनलों और मीडिया में डॉ. ज़ाकिर नाइक के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी करने वाले मसलक़ों के ठेकेदार कुछ उलमा
भी इस खेल को नहीं समझ पारहे हैं ..।
कुछ तो शर्म करिये...
रही बात इस्लाम की तो पढ़िये पहले इस्लाम.को .क्योंकि इस्लाम कहता है......
"पयामे अहले आलम का ये ईमाँ हो नहीं सकता
लहू का है जो प्यासा वो निगहबां हो नहीं सकता
जो क़त्ले आम करता है ज़मीं पर बेगुनाहों का
दरिन्दा होगा कोई वो मुसलमाँ हो नहीं सकता ।"
#ShahzadaKaleem
रविवार, 10 जुलाई 2016
एक सवाल जो ज़ाकिर नाइक के खिलाफ है उम्मीद है वो जवाब जरूर देंगे
Posted by Unknown in: खास खबरमैं नही जानता की डॉक्टर नायक सही हैं या ग़लत...
पर कुछ उलेमाओं को देख रहा हू जो डॉ ज़ाकिर को गिरफ्तार करने के लिए सड़कों पे उतर आये। उनका विरोध पूरी ताक़त के साथ कर रहे हैं।। अगर डॉ ज़ाकिर नायक ग़लत हैं तो अच्छी बात है विरोध लाज़मी है।
मगर ये उलेमा भारत की जेलों में बंद बेगुनाह मु सलमानो की रिहाई के लिए कभी सड़क पे नहीं उतरे।
गुजरात जला.... मोदी के ख़िलाफ़ नहीं उतरे
मुज़फ्फरनगर जला....अखिलेश के ख़िलाफ़ नहीं उतरे
मुसलमानो के खिलाफ भारत में हुए 26000 दंगों के खिलाफ नहीं उतरे।
सच्चर कमिटी और रंगनाथ मिश्रा कमीशन रिपोर्ट लागू कराने के लिए सड़क पे नहीं उतरे जिस से मुसलमानो को शिक्षा और सरकारी नौकरियां मिलनी हैं।
भारत में नफरत की बीज डाल रहे भगवत, तोगड़िया, योगी, प्राची साध्वी, प्रज्ञा साध्वी , असीमानंद, कर्नल पुरोहित और तमाम संघियों के ख़िलाफ़ सड़क पे नहीं उतरे जिससे मुसलमानो की आने वाली नस्लों को खतरा है।
मगर अपने एक भाई के खिलाफ सीना फुला कर ऐसे सड़क पे उतरे हैं जैसे भारत से अफगानिस्तान तक की हुकूमत इनके बाप की है।।।
शर्म आनी चाहिए।।।
सोमवार, 4 जुलाई 2016
यू एन ने लगाई भारत को फटकार कहा जातिवाद को लेकर कत्ल कराना बन्द करे मोदी सरकार
Posted by Unknown in: खास खबर
ब्राह्मणी सरकारें हमेशा ही जाति और जातिवाद के खिलाफ उठती हर आवाज का विरोध करती रही हैं. और यदि यह मुद्दा विश्व के सामने उठे तब तो इनका विरोध देखते ही बनाता है. गोलमेज कान्फरेन्स में पहली बार बाबासाहब ने जाति और जातिवाद के कारण देश की बहुत बड़ी आवादी की नरक बनी जिंदगी से विश्व को रुवरु कराया था. जिसका विरोध गांधी, मालवीय सबने किया था. गांधी ने अपने अखबार 'हरिजन' के माध्यम से भी पुरे विश्व को गुमराह किया. भारत में वर्णव्यवस्था के कारण बहुजन के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार की कभी अपने अखबार में चर्चा नहीं की. ये सिलसला रुका नहीं. अब भी जब जातीय भेदभाव और छुआछूत का मुद्दा संयुंक्त राष्ट्र संघ में उठाया जाता है तो भारत सरकार तुरंत विरोध करती है.
अभी भी यही हुआ है. 28 जनवरी 2016 को एक विस्तृत रिपोर्ट 'अल्पसंख्यक मामलों पर' UN में रखी गई है. इसमें 'जातीय भेदभाव' को 'वैश्विक त्रासदी' बताया है. इसमें कहा गया है कि जाति व्यवस्था (भारत में वर्ण व्यवस्था), मानवीय गरिमा, समानता और बंधुत्व के खिलाफ है. रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि कैसे, क्यों एक जाति में पैदा लोग पूज्यनीय हो सकते हैं जबकि दूसरी जाति में पैदा लोग अस्पृशय.
लेकिन भारत की ब्राह्मणी सरकारें इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है. जबकि देश में हालात ऐसे हैं कि - " बहुजन है तो समझो जान से गया" बहुजन यदि छू ले सवर्ण की बाल्टी, तो बहुजन हाथ-पैर से गया. बहुजन यदि मूत दे किसी ठाकुर के खेत में, तो बहुजन जान से गया. बहुजन प्रतिबन्धित हैं नहीं ले सकते,सर्वनाजिक कुओं, नलों, नदी से पानी,यदि ले लिया तो समझो जान से गया.
यदि कोई बहुजन मुख्यमंत्री,बाबासाहब के नाम से बनाये कोई प्रेरणा स्थल,तो समझो सरकार से गया. नया सवर्ण अफसर जब संभाले आफिस,तो पहले शुद्धिकरण करवाता है,यदि पिछला बहुजन अफसर तबादले पर गया. यदि प्रतिनिधित्व कानून से बहुजन तरक्की करें, तो निजीकरण की आड़ में प्रतिनिधित्व कानून गया. यदि एकलव्य अपनी स्वयं की प्रतिभा से,तीरंदाज बन किसी अर्जुन के लिए चुनौती बन जाये,तो एकलव्य का अंगूठा गया.
अभी भी यही हुआ है. 28 जनवरी 2016 को एक विस्तृत रिपोर्ट 'अल्पसंख्यक मामलों पर' UN में रखी गई है. इसमें 'जातीय भेदभाव' को 'वैश्विक त्रासदी' बताया है. इसमें कहा गया है कि जाति व्यवस्था (भारत में वर्ण व्यवस्था), मानवीय गरिमा, समानता और बंधुत्व के खिलाफ है. रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि कैसे, क्यों एक जाति में पैदा लोग पूज्यनीय हो सकते हैं जबकि दूसरी जाति में पैदा लोग अस्पृशय.
लेकिन भारत की ब्राह्मणी सरकारें इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है. जबकि देश में हालात ऐसे हैं कि - " बहुजन है तो समझो जान से गया" बहुजन यदि छू ले सवर्ण की बाल्टी, तो बहुजन हाथ-पैर से गया. बहुजन यदि मूत दे किसी ठाकुर के खेत में, तो बहुजन जान से गया. बहुजन प्रतिबन्धित हैं नहीं ले सकते,सर्वनाजिक कुओं, नलों, नदी से पानी,यदि ले लिया तो समझो जान से गया.
यदि कोई बहुजन मुख्यमंत्री,बाबासाहब के नाम से बनाये कोई प्रेरणा स्थल,तो समझो सरकार से गया. नया सवर्ण अफसर जब संभाले आफिस,तो पहले शुद्धिकरण करवाता है,यदि पिछला बहुजन अफसर तबादले पर गया. यदि प्रतिनिधित्व कानून से बहुजन तरक्की करें, तो निजीकरण की आड़ में प्रतिनिधित्व कानून गया. यदि एकलव्य अपनी स्वयं की प्रतिभा से,तीरंदाज बन किसी अर्जुन के लिए चुनौती बन जाये,तो एकलव्य का अंगूठा गया.
मंगलवार, 28 जून 2016
शायर इमरान प्रतापगढ़ी का खुला खत CM अखिलेश यादव के लिए
Posted by Unknown in: खास खबरप्रिय अखिलेश जी.......।
आ गये ना अपने फ़ासिस्ट सलाहकारों के झॉंसे में...?
डी.पी. यादव, रामपाल यादव, अतीक़ अहमद, मुख़्तार अंसारी
इन तमाम अपराधियों को आप अपने नज़दीक नहीं आने देना चाहते !
चलिये मान लिया साहब....!
अच्छी बात है !
लेकिन भाई साहब
वो जो आपके बेहद क़रीब, पार्टी में, अापकी कैबिनेट में कुछ अपराधी बैठे हैं......उन पर चुप्पी क्यूं !
गिनती दर्जनों में है !
अतीक़, मुख़्तार, डी. पी. से दूरी बनाने वाला ये युवा तेवर
उस वक्त क्यूं मजबूर दिखता है जब उसे सपरिवार विधान परिषद का वोट मॉंगने ग़ुन्डों के पास ही जाना पडता है !
मुख्तार पर आपका ग़ुस्सा देखा हम सबने
लेकिन भाई साहब आपका ये ग़ुस्सा उस वक्त कहॉं ग़ायब हो जाता है
जब एक दो टके का दंगाई विधायक विधिवत आपको चुनौती देकर अपने हज़ारों हरियार बंद ग़ुन्डों के साथ कैराना कूच करके दंगों के लिये ज़मीन तैयार करता है !
आप उस वक्त नाराज़ क्यूं नहीं नज़र आते जब प्राची और योगी आदित्यनाथ अापको ललकार कर कहते हैं कि दम है तो हम पर कार्यवाही करके दिखाओ !
अपनी पूरी ताक़त लगाकर रामपाल यादव को नेस्तनाबूद कर देने वाला ये युवा तेवर
अापके चाचा को चिढाकर भाजपा को वोट देने वाले ग़ुन्डे विधायक गुड्डू पंडित के आगे लाचार क्यूं हो जाता है !
रामपाल को तो आप सडक पर पिटवाते हैं लेकिन गुड्डू पंडित के घर एक सिपाही तक नहीं भेज पाते
इसे क्या समझा जाये भाई साहब
कि आपकी नज़र में सिर्फ यादव और मुस्लिम ग़ुन्डे ही अपराधी हैं...........?
बाकी सब दूध के धुले हैं !
नीतीश कुमार ने भी आप जैसा ही काम किया था, छवि भी सुशासन वाली थी, लेकिन वो जानते थे कि सामाजिक न्याय की इस लडाई में फासिस्ट ताक़तों का मुकाबला सिर्फ विकास के नारों से नहीं किया जा सकता !
लालू से हाथ मिलाने पर बिकाऊ मीडिया ने कहा था कि नीतीश की लुटिया डूब जायेगी...।।।
लेकिन नीतीश मोरल दबाव में नहीं आये
परिणाम आपके सामने है
इस बार लडाई बहोत बडी है....... !
फासिस्ट और दंगाई ताक़तों ने कमर कस ली है
और आप मीडिया के उन मुनाफ़िकों से सलाह मशवरा करके फैसले ले रहे हैं, जो आपसे करोडों का विज्ञापन लेकर
लोहिया के ऑंगन में ग़ुन्डे और कैराना को कश्मीर बताने की साज़िशों में लगे हैं !
जागिये भाई साहब
बुधवार, 22 जून 2016
रघूराम राजन (गवर्नर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के मुताबिक़ हमारे देश पर 55 लाख 87 हज़ार 149 करोड़ का कर्ज़ है...।
Posted by Unknown in: खास खबररघूराम राजन (गवर्नर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के मुताबिक़ हमारे देश पर 55 लाख 87 हज़ार 149 करोड़ का कर्ज़ है...।
जिसका एक साल का ब्याज भरना पड़ रहा है= 4 लाख 27 हज़ार करोड़...।
यानि एक महीने का= 35 हज़ार 584 करोड़...।
यानि एक दिन का= 1 हज़ार 186 करोड़...।
यानि एक घंटे का= 49 करोड़...।
यानि एक मिनट का 81 लाख...।
यानि एक सेकेंड का 1,35,000
अब ज़रा सोचिए! हमारा देश प्रति एक सेकेंड 1 लाख 35 हज़ार रूपये का तो सिर्फ़ पुराने कर्ज़े का ब्याज भर रहा है...।
किसान आत्महत्या कर रहा है क्योंकि उन्होंने अपना ज़मीर बेच दिया है तभी तो हालात से लड़ने के बजाए मौत को चुन रहे हैं... रहा सवाल नेताओं का तो उनका भला कैसा ज़मीर..? बचा ये मुआशरा जो कोल्ड ड्रिंक जैसे ज़हर को ख़रीदते वक़्त तो कोई भाव ताव नहीं करेगा और सब्ज़ी, फल और जितनी भी स्वदेशी चीज़ें हैं उन्हें एक एक पैसा कम कराने की जुगत में रहता है...।
हमारा आज तो गुज़र रहा है लेकिन हमारी नस्लों का आने वाला कल हमारे चुने हुवे नेताओं और हमारे टूटे हुए ज़मीर की वजह से बेकार, बर्बाद व अंधकार में डूबा हुआ रहेगा और इस सब के ज़िम्मेदार हम खुद होंगे...।
हो सकता है कि कुछ लोगों को मेरा ये फिक़्र महज़ एक वाक्य लगे, दुआ करता हूँ कि मैं ग़लत रहूँ इस मसअले पर लेकिन हूँ नहीं ये मैं भी जानता हूँ और आप भी...।
हमारा मकसद किसी पार्टी को टार्गेट करना बिल्कुल नहीं है, क्योंकि अब तक जितनी भी पार्टियों ने राज किया है सबने देश को लूटने का ही काम किया है... सबने आम जनता का खून ही पिया है, कोई न अच्छे दिन ला सका है न ला सकेगा, वजह अपना पेट बस अपना... मीडिया को कैन्सर की बिमारी है, जो राज करेगा उसके तलवे चाटेगी... आगे देश के हालात क्या होने हैं ये किसी लीडर के लिए मायने नहीं रखता...। उन लीडरों की मानसिकता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सब धर्म की राजनीति करने में लगे हैं, देश का बेहतर कल गया तेल लेने...।
इस हालात पे बाबा (मुनव्वर राना) की एक ग़ज़ल सुनहरे अक्षरों में लिखे जाने योग्य है, जो इस परिस्थिति को साफ़ अल्फ़ाज़ों में आईना बनाकर दिखाती है...
हर एक आवाज़ ऊर्दू को फरियादी बताती है
ये पगली फिर भी ख़ुद को शहज़ादी बताती है
यहाँ पिछले कई सालों से काले नाग रहते हैं
वहाँ एक घोसला चिड़ियों का था दादी बताती है
यहाँ विरानियों की एक मुद्दत से हुक़ूमत है
यहाँ से नफ़रतें गुज़री हैं, बर्बादी बताती है
लहू कैसे बहाया जाए ये लीडर समझते हैं
लहू का ज़ाएका क्या है, ये ख़ादी बताती है
गुलामी ने अभी तक मुल्क़ का पीछा नहीं छोड़ा
हमें फिर क़ैद होना है, ये आज़ादी बताती है...।
Tanveer Tyagi
शुक्रवार, 17 जून 2016
इस्लाम में दाढ़ी रखने का हुक्म है ही पर साइन्स दाढ़ी रखने पर जोर क्यू देता है
Posted by Unknown in: खास खबर 8 Commentsजिन लोगों में दाढ़ी को लेकर एक अलग तरह का डर रहता है उनके इस डर को न्यूयॉर्क में हाल ही में हुए एक शोध ने और सहमती दे दिया था जिसमें बताया गया कि घनी दाढ़ी में बैक्टीरिया का मल मौजूद रहता है। ऐसा माना जाता है कि कुछ लोगों की दाढ़ी में टॉयलेट सीट से ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं।
वहीं अमेरिका के एक अस्पताल में किया गया एक प्रयोग जो इससे एकदम उलट कहानी कहता है।
क्या कहता है अमेरिका के एक अस्पताल में किया गया प्रयोग
अमेरिका के एक अस्पताल में किया गया प्रयोग जर्नल्स ऑफ हास्पिटल इन्फेक्शन में छपा है। अस्पताल के करीब 408 स्टॉफ के चेहरे को क्लीन शेव किया गया। ऐसा करने का एक वाजिब कारण भी था। हम सभी जानते हैं कि अस्पताल एक ऐसी जगह होती है जहां पर इन्फेक्शन सबसे ज्यादा होता है।
अस्पताल ही ऐसी जगह होती है जहां एक हांथ से दूसरे हांथ में बैक्टीरिया आसानी से बटा करते हैं। हांथ, सफेद कोट, टाई और इक्विपमेंट इन सभी को बैक्टीरिया के संक्रमण के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन दाढ़ी के बारे में लोग कम ही बोलते हैं।
प्रयोगकर्ता यह जानकर हैरान रह गए कि क्लीन शेव लोगों को दाढ़ी रखने वालों की तुलना में चेहरे पर थोड़ा अजीब सी अनचाही तकलीफ महसूस हुई। जिन लोगों ने दाढ़ी नहीं रखी थी उनके क्लीन शेव चेहरे पर मिथाइसिलिन रेसिसटेंस स्टॉफ एनारस के होने की तीन गुना ज्यादा संभावना पाई गई।
यह अस्पताल में एक आम परेशानी और मुश्किल का स्त्रोत होता है क्योंकि यह तमाम एंटीबायोटिक्स के लिए प्रतिरोधकता रखता है।
शोधकर्ताओं ने माना कि शेव्ड चेहरे पर ऐसी सूक्ष्म खरोचें होती हैं जो बैक्टीरिया को पनपने का पर्याप्त स्थान दे देती हैं। लेकिन दाढ़ी ऐसे बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण से रोकती है।
इसी चलते अस्पताल के लोगो ने सबको बताने लगे की दाढ़ी रखो बिमारी से दूर रहोगे









