बुधवार, 3 अगस्त 2016
जब दुश्मनो ने मेरे आक़ा के चेहरे मुबारक पर पत्थर मारा और मेरे आक़ा एक खड्डे में गिरे तब भी आक़ा ने किसी को बद्दुआ नहीं दिए और हम आज
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आज भी उस मन्ज़र को मैं याद करता हूँ तो मेरे आँखों से आंसू निकल आते है
जब मेरे आक़ा 2आलम के मुख्तार नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम पर दुश्मनो ने हमला किया था
जंगे उहद जोर और शोर से चल रही है रसुलल्लाह अपने सहाबा के साथ दुश्मनो के बीच में है एक दुश्मन रसूलल्लाह के चेहरे पर पत्थर मारता है और वो सहाबा ए किराम के दरमियान से निकलकर रसूलल्लाह के चेहरे पर लग जाता है आप उस पत्थर के जोर से पीछे खड्डे में गिर जाते है आपके सर के पिछले हिस्से को भी मार लग जाती है चेहरा खून से आलूद हो जाता है 2 दांत शहीद हो जाते हैं
सहाबा ए किराम आपको खड्डे से निकालकर आपसे कहते है के ऐ अल्लाह के रसूल अब तो इन काफिरों के लिए बद्दुआ किजिये रसूलल्लाह फ़ौरन दुआ के लिए हाथ उठाते हैं !
और कहते हैं ऐ अल्लाह ये मुझे जानते नहीं है तू उनको हिदायत दे!
देखिये हम इनके नामलेवा है जिन्होने अपने दुश्मनो को भी गले से लगाया कभी बद्दुआ तक नहीं की और हम हर छोटी बात एक दूसरे को नंगा करने और बेइज़्ज़त करने में लग जाते हैं ! !
सुब्हान अल्लाह !!
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