सोमवार, 11 जुलाई 2016

झूटी खबर फ़ैलाने वाली मिडिया क्या सबके सामने माफ़ी मांगेगी : शायर शहज़ादा कलीम

Posted by Unknown

"जिस दिन भी हिचकिचायेगी सच से ये शायरी
 काग़ज़ को  फाड़  देंगे क़लम तोड़ देंगे हम..।"

लिखता रहूँगा....आख़री साँस तक.........हक़ और
इंसाफ़ की आवाज़ बनकर.....

वरना अलविदा कह दूँगा इस दोगले चेहरे और भड़ैती के अलंबरदारों से सजे मंचों की दुनियाँ को......मेरा ज़मीर इतना भी नहीं गिर गया के घूमता रहूँ लग्ज़री गाड़ियों में ग्लैमर के नशे में डूबकर और मेरी क़ौम.. समाज, देश नफ़रतों के बारूद के मुहाने पर हो.....।

ज़ाकिर नाइक को बदनाम करने की
 घिनौनी कोशिश..।

एक अपील....ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कर लोगों तक
पहुँचायें..।
.....

डॉ. ज़ाकिर नाइक को बदनाम करने वाली दोगली मीडिया जिसतरह बिना किसी सुबूत के एक ज़िम्मेदार इंसान को बदनाम करने पर तुली है.....ऐसे वक़्त में जब  एक लम्बे
चौड़े मीडिया ट्रायल के बाद आख़िरकार 'दि डेली स्टार'
नामक बंगला देशी अख़बार को कुछ शर्म आई है ....और वो अपने उस न्यूज़ आर्टिकल से पल्लू छुड़ाते हुए जिसमें उसने एक ढाका आतंकी को डॉ ज़ाकिर नाइक से मुतास्सिर बताया था..से पीछे हट गया है ........और भी सुबूत न मिलने पर अपनी इस घिनौनी हरकत के लिए  क्या बिकाऊ मीडिया ....डॉ. ज़ाकिर नाइक से पूरी दुनियाँ के सामने
खुले तौर पर माफ़ी मांगेगी..?
ये सवाल है मशहूर शायर शहज़ादा कलीम का

     रही बात डॉ. ज़ाकिर नाइक की तो डॉ. ज़ाकिर नाइक कोई लापता इंसान नहीं हैं...महाराष्ट्रा में आपकी सरकार.है..केंद्र में आपकी सरकार....अगर वो क़ुसूरवार हैं तो दर्ज कीजिये उनपर मुक़दमा...और अगर ग़ैर ज़मानती धारा लग रही है तो गिरफ़्तार कीजिये उन्हें कौन रोक रहा है आपको..?

जिस तरह का जाल बना गया ज़ाकिर नाइक इस वक़्त जेल में होते ख़ुदा न ख़ास्ता आज अगर उनके बयान आन दी रिकॉर्ड न होते...क़ानून को अपना काम करने दीजिये सबकुछ सच्चाई सामने आएगी बस इंतज़ार
करिये..।

डॉ ज़ाकिर नाइक के ज़रिये जो खेल खेला जारहा है उससे साफ़ महसूस होता है के एक ख़ास तबक़े का चैन सुकून छीनने की कोशिश की जारही है..।    यूपी चुनाव के मद्देनज़र हर बात का राजनीतिक तमाशा मत बनाइये.... कैराना भी खेल लिया,  लव जिहाद भी खेल लिया,  मुस्लिम मुक्त भारत भी खेल लिया, गऊ माता  और घर वापसी भी खेल लिया, अब मुस्लिम धर्म गुरुओं को आतंकवादी बताने का खेल खेला जारहा है..।

चैनलों और मीडिया में डॉ. ज़ाकिर नाइक के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी करने वाले मसलक़ों के ठेकेदार कुछ उलमा
भी इस खेल को नहीं समझ पारहे हैं ..।

कुछ तो शर्म करिये...

रही बात इस्लाम की तो पढ़िये पहले इस्लाम.को .क्योंकि इस्लाम कहता है......

"पयामे अहले आलम का ये ईमाँ हो नहीं सकता
लहू का है जो प्यासा वो निगहबां हो नहीं सकता
जो क़त्ले आम करता है ज़मीं पर बेगुनाहों का
दरिन्दा होगा कोई वो मुसलमाँ हो नहीं सकता ।"

#ShahzadaKaleem

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